बॉलीवुड फिल्मों में खलनायक के किरदार निभाने वाले कलाकार भूपेंद्र सिंह का मानना है कि संयम से ही सफलता की सीढ़ी पर चढ़ा जा सकता है। फिल्मी दुनिया की मायानगरी चकाचौंध से भरी है। इसमें काफी मेहनत करनी पड़ती है। देखने में आ रहा है कि युवा बॉलीवुड में आकर शॉर्टकट के जरिये जल्दी ही कामयाब होने के सपने देखने लगते हैं।
वे भले ही एंट्री पाने में कामयाब हो जाएं, लेकिन खुद को साबित करने में बहुत चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। भूपेंद्र सिंह सोमवार को करनाल में एएफआई फिल्म इंस्टीट्यूट में कार्यशाला में शिरकत करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को फिल्मी दुनिया के टिप्स दिए।
पत्रकारों से बातचीत में भूपेंद्र सिंह ने कहा कि सपने वो नहीं होते जो सोते समय देखे जाते हैं, बल्कि सपने वो होते हैं जो आपको सोने ही नहीं देते। फिर आप बेचैन हो जाते हैं उन सपनों को साकार करने के लिए। अभिनेता बनने के लिए किस्मत के साथ साथ आर्थिक रूप से पूर्ण होना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि अपने 14 साल के करियर में उन्होंने 42 फिल्मों में काम किया है। जय हो, राउडी राठौर व धूम मुख्य फिल्म रही हैं। खास बात यह कि इन सभी फिल्मों में निगेटिव रोल ही किया है। विलेन का रोल करना बड़ा मुश्किल होता है, लेकिन अगर आदमी के अंदर जुनून हो तो कुछ भी असंभव नहीं है।
कुछ ही दिनों आए एम दी किंग, वेलकम बैक फिल्म आने वाली हैं। हरियाणा से बहुत कम कलाकार निकलने के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कलाकार कहीं से भी निकल सकते हैं। आवश्यकता है तो सिर्फ अपने आप को पहचानने की।
भूपेंद्र ने बताया कि उनका जन्म पंजाब में हुआ और शिक्षा दिल्ली से प्राप्त की। उन्होंने जेटीबी खालसा कॉलेज दिल्ली से बीए की परीक्षा पास की है। उस समय उनकी दोस्ती थियेटर स्टूडेंट से हो गई और उन्होंने उसे फिल्म इंडस्ट्री में जाने को प्रेरित किया। भूपेंद्र को खेलों का शौक है और उन्होंने 1999 एशिया कराटे प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल भी जीत चुके हैं।