शनिवार और उससे पहले हुई बारिश तथा ओलावृष्टि से जिले में खेती पर जबर्दस्त मार पड़ी है। सबसे अधिक नुकसान गेहूं और आलू को हुआ है। करीब 45 हेक्टेयर गेहूं की फसल चौपट हो गई है। उद्यान क्षेत्र में 28 से 30 प्रतिशत तक नुकसान का अनुमान है।
मुख्य कृषि अधिकारी डी कुमार का कहना है कि शनिवार को हुई बारिश तक जिले में 45.3 हेक्टेयर गेहूं बर्बाद हो गया है। इसके अलावा 5.3 हेक्टेयर खेती की जमीन का कटान हुआ है। विभाग का कहना है कि आमतौर पर किसान फसल बीमा कम कराते हैं। अलबत्ता फसली कर्ज लेने वालों का बैंक खुद अनिवार्य बीमा करते हैं, लेकिन ये तादाद बहुत कम है।
वहीं उद्यान क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान आलू को हुआ है। जिला उद्यान अधिकारी एचसी तिवारी ने बताया कि आलू, अदरक और हल्दी की बुवाई को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। मैदान और घाटी वाले इलाके अमोड़ी, च्यूरानी, घाट, पंचेश्वर, श्रीरीठा साहिब आदि में आम और लीची के बौर पर मार पड़ी है। सेब, पुलम और आड़ू पर भी बारिश ने कहर ढाया है। खतेड़ा नर्सरी को भी बारिश ने चपेट में लिया है।
राजस्व विभाग भी कराएगा नुकसान का आकलन
चंपावत। उद्यान और कृषि विभाग की टीम सप्ताह भर में नुकसान की पूरी रिपोर्ट भेजेंगी, जबकि राजस्व विभाग की टीम विस्तृत सर्वे कर आपदा का आकलन करेगी। फसल के नुकसान होने पर किसानों को असिंचित क्षेत्र में प्रति हेक्टेयर 5000 और सिंचित एरिया में 8000 रुपए का मुआवजा मिलेगा।