केश कुमार सिंह
नगर आयुक्त, लखनऊ
शहर के नागरिकों को अधिक से अधिक सुविधाएं देने के लिए हम तैयारी कर रहे हैं। कोशिश यह है कि हम सुविधाएं दें और नगर निगम के खर्चों को घटाया जाए।
इसी के तहत हम पहले चरण में जोन-5 में 25 हजार एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने जा रहे हैं। यह प्रोजेक्ट सफल होने पर पूरे शहर में यही व्यवस्था लागू होगी।
इससे स्ट्रीट लाइट का खर्च भी आधा हो जाएगा। इससे सालाना करीब 50 लाख रुपये की बचत होगी।
हालांकि, हमारे पास सफाई कर्मी काफी कम हैं लेकिन कोशिश है कि जो हैं वे तो काम पर आएं। इसके लिए टीमें बनाकर हम कुल सफाई कर्मियों और काम पर न आने वालों को चिह्नित कर रहे हैं।
दरअसल, खर्चे काफी बढ़ते जा रहे हैं और आय नहीं बढ़ रही। नगर निगम पर करीब 150 करोड़ से ज्यादा की देनदारियां हैं। अक्तूबर 2012 से अब तक 13वें वित्त आयोग का करीब 80 करोड़ रुपये का फंड भी एसटीपी के चलते नगर निगम से कट गया। इससे नगर निगम पर बोझ और बढ़ गया है।
नहीं हुई थी लंबे समय से मीटिंग
मैंने अक्तूबर 2012 में जब नगर आयुक्त का पद संभाला था तो देखा कि समग्र विकास योजना का पैसा नहीं आया था। अवस्थापना की मीटिंग लंबे समय से नहीं हुई थी। 13वें वित्त आयोग की मीटिंग नहीं हुई थी। करीब 42 करोड़ रुपये का कहीं इस्तेमाल नहीं किया गया था।
प्राथमिकता के साथ पहले इन कामों को किया। इसके बाद ठेकेदारी में पारदर्शिता के लिए ई-टेंडरिंग शुरू की।
...तो कई इलाके जलभराव से बच जाते
जलभराव की समस्या अनियोजित काॅलोनियों में है। नए नाले नेटवर्क में शामिल होने से इस बार जलभराव कम हुआ है। अलीगंज, जानकीपुरम व महानगर में थोड़ी दिक्कत हुई।
इसका हल भी था हमारे पास लेकिन सेना ने मदद नहीं की। सेना अगर सीवरलाइन के लिए अगर बादशाह नगर में अनुमति दे देती तो कई इलाके जलभराव से बच जाते।