10 जर्जर हालत में कमरे, टूटी-फूटी मेज-कुर्सियां, 500 से भी कम बच्चों की क्षमता और परीक्षा देंगे 800 बच्चे। यह हाल है इटौंजा के हीरादेवी बालिका इंटर कॉलेज का।
कॉलेज प्रशासन ने बच्चों की संख्या कम करने को कहा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इटौंजा कस्बे के सीतापुर रोड स्थित हीरादेवी बालिका इंटर कॉलेज को हर साल की तरह ही इस बार भी यूपी बोर्ड परीक्षाओं के लिए केंद्र बनाया गया है।
लेकिन इस कॉलेज में हर बार की तरह ही अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। तीन साल पहले सीतापुर रोड चौड़ीकरण की जद में आने के कारण इस कॉलेज के कई कक्ष तोड़े गए थे। कॉलेज परिसर में पुरानी ईंटों का ढेर लगा है।
इसके बाद प्रबंधतंत्र ने कुछ कमरों का निर्माण कराया लेकिन कई कमरे अब भी टीनशेड के नीचे चल रहे हैं। इन कमरों में पर्याप्त रोशनी तक नहीं है। इसके अलावा मेज-कुर्सियों की हालत तक खस्ताहाल है।
इन सभी अव्यवस्थाओं के बीच प्रशासन ने कॉलेज की क्षमता से अधिक बच्चों का परीक्षा केंद्र इस विद्यालय को बना दिया। इनमें 400 हाईस्कूल व 400 बच्चे इंटर के हैं।
जबकि कॉलेज में किसी भी तरह से 500 बच्चे भी परीक्षा नहीं दे सकते। ऐसी स्थिति में बच्चों की परीक्षा कैसे होगी, यह बड़ा सवाल है।
इस संबध में कॉलेज प्रशासन की ओर से जिला विद्यालय निरीक्षक को भी पत्र भेजकर कॉलेज में परीक्षार्थियों की संख्या कम करने की मांग की गई लेकिन किसी भी अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
इस संबध में हीरादेवी बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या लक्ष्मी तिवारी से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि कॉलेज में 10 कमरों में परीक्षा होगी। मेज-कुर्सी दुरुस्त कराई जा रही है।
परीक्षा के समय तक कॉलेज को परीक्षा केंद्र के रूप में पूरी तरह से तैयार करा लिया जाएगा। वहीं, जिला विद्यालय निरीक्षक पीसी यादव का कहना था कि सभी बच्चों की परीक्षा एक साथ नहीं पड़ेगी।
इसलिए परीक्षा आसानी से हो जाएगी। अगर और किसी चीज की जरूरत होगी तो डीआईओएस कार्यालय की ओर से विद्यालय की मदद की जाएगी।
सड़क नहीं फिर भी बने परीक्षा केंद्र
इटौंजा के गांव हनुमंतपुर में स्थित रामा कॉन्वेंट कॉलेज तक यातायात के संसाधन नहीं है। इस स्कूल को परीक्षा केंद्र बना दिया गया है। स्कूल तक जाने वाली सड़क भी तीन किलोमीटर तक खुदी पड़ी है।
ऐसी हालत में बच्चों को करीब पांच किलोमीटर घूमकर निजी साधनों से ही स्कूल जाना पडेगा। यही हालत बीकेटी व इटौंजा इलाके के कई परीक्षा केंद्र बनाए गए स्कूलों की भी है।