नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च में दो हफ्ते की वर्कशॉप शुरू हुई। इसमें दस देशों के 16 डेलिगेट्स हिस्सा ले रहे हैं।
वर्कशॉप का उद्घाटन सोमवार को नाइपर के डायरेक्टर प्रो. केके भूटानी ने किया। उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा हर साल विकासशील देशों के लिए यह कोर्स आयोजित किया जाता है।
भारत में फार्मा इंडस्ट्री मेडिकल केयर प्रोडक्ट बनाने एवं निर्यात करने में अहम रोल निभा रही है। पिछले कुछ दशकों में जेनरिक दवाइयां बनाने में काफी प्रगति हुई है।
यहां बहुत ही कम कीमत में क्वालिटी मेडिसिन तैयार की जा रही हैं। बायो फार्मा की ग्रोथ 17 फीसदी और जेनरिक्स की ग्रोथ दस फीसदी दर्ज की गई है।
प्रो. भूटानी ने कहा कि कीमत और क्वालिटी किसी भी दवाई के लिए प्रमुख फैक्टर हैं। यह कोर्स भी इसी पर आधारित है। इसमें क्वालिटी पर नवीनतम तकनीक की जानकारी दी जाएगी।
उन्होंने डेलिगेट्स से अपील की कि वे इस कोर्स का पूरा फायदा उठाएं। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय जाचक ने कहा कि वर्कशॉप के दौरान डेलिगेट्स को फार्मास्यूटिकल्स की क्वालिटी पर सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक जानकारी दी जाएगी। रजिस्ट्रार पीजेपी सिंह वड़ैच ने सभी का धन्यवाद किया।