राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) के तहत प्रदेश के सैकड़ों स्कूलों में बगैर लैब के करोड़ों रुपए के लैब उपकरण खरीद लिए गए हैं। 300 से अधिक स्कूलों ने इस तरह के उपकरण खरीदे हैं, जो खरीदे जाने के बाद से स्कूलों की अलमारियों में बंद हैं।
रमसा के तहत सरकारी हाईस्कूलों में लैब उपकरण के लिए प्रत्येक स्कूल को एक लाख रुपए लैब उपकरण एवं 25 हजार रुपए हर साल इसके रखरखाव के नाम पर दिए जा रहे हैं।
केंद्र से मिलने वाली इस धनराशि से इलेक्ट्रो मीटर, लैंस, चार्ट, मॉडल आदि विज्ञान से संबंधित उपकरण खरीदे गए हैं। एक ओर इनकी खरीद अधिक कीमत पर करने की बात सामने आई है। वहीं इनकी खरीद के बाद से ही इनके अलमारियों में बंद होने से बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
यहां चल रहा लैब का काम
राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शेरगढ़ के प्रभारी प्रधानाध्यापक राम राज यादव बताते हैं कि स्कूल में लैब का काम चल रहा है। इसे पूरा होने में छह माह से एक साल लग सकता है। लैब का सामान वर्ष 2011 में खरीद लिया गया था, जो स्कूल में लैब न होने से अलमारी में रखा है।
उपकरण खरीदे नहीं है लैब
जीआईसी दसऊ चकराता में एक लाख रुपये की लागत से बच्चों के लिए लैब उपकरण क्रय किए गए हैं, लेकिन इसके प्रयोग के लिए यहां समेकित लैब तैयार नहीं हो पाई है। इस स्कूल में विभाग की ओर से लैब के लिए सामान दिया गया, लेकिन लैब निर्माण के लिए बजट नहीं मिल पाया है। स्कूल के प्रधानाध्यापक अमित कुमार के मुताबिक स्कूल में लैब नहीं है।
यहां तैयार नहीं हो पाई लैब
प्रदेश के 550 स्कूलों में लैब प्रस्तावित है। इसके लिए स्कूलों को धनराशि आवंटित की जा चुकी है, लेकिन 300 से अधिक विद्यालयों में लैब का निर्माण कार्य अब भी पूरा नहीं हो पाया है। वहीं, 1500 स्कूलों में लैब उपकरण क्रय किए गए हैं। इसके लिए हर विद्यालय को एक लाख रुपये आवंटित किए गए हैं।
स्कूलों का निरीक्षण किया जा रहा है। समीक्षा की जाएगी कि लैब का काम पूरा क्यों नहीं हुआ? किसी भी तरह की गड़बड़ी पर कार्रवाई की जाएगी।
- डी. सेंथिल पांडियन, शिक्षा महानिदेशक