अब कॉलेज व विश्वविद्यालय विदेशी छात्र-छात्राओं को सीधे एडमिशन नहीं दे सकेंगे। यूजीसी के सख्त निर्देश हैं कि भारतीय दूतावास को जानकारी देनी होगी व यूजीसी क्रे अपूवल के बाद ही विदेशी छात्रों को दाखिला दिया जा सकता है।
अभी तक विश्वविद्यालयों के एजेंट विदेशों में स्टूडेंट्स को डायरेक्ट एडमिशन दे देती हैं। उन्हें कोर्स में दाखिले के लिए तरह-तरह के प्रलोभन दिए जाते हैं।
लेकिन जब यूनिवर्सिटीज व कॉलेज अपने वादे पर खरा नहीं उतरते तो भारत की बदनामी होती है। यही नहीं, विदेशी छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी खतरा रहता है। ऐसे में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने यह निर्देश जारी किए हैं।
यूजीसी के सेकेटरी प्रो. जसपाल एस संधु के अनुसार अब कॉलेज व विश्वविद्यालय विदेशी स्टूडेंट्स को डायरेक्ट दाखिले नहीं दे सकेंगे। विदेशी छात्रों को दाखिला देने से पहले भारतीय दूतावास से इसकी अनुमति लेनी होगी।
साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय व यूजीसी दोनों से स्वीकृति लेनी होगी। अगर कोई विश्वविद्यालय व कॉलेज नियम बगैर एडमिशन देते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
यह निर्देश सभी यूनिवर्सिटीज के कुलपतियों को भेज दिया गया हैं। उन्हें यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने से संबद्ध कॉलेजों को भी इसके बारे में अवगत करवा दें, ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियां न कर पाएं।
दरअसल, लगातार खुल रहे निजी विश्वविद्यालय अपने यहां तरह-तरह के प्रलोभन देकर दाखिला लेते हैं और बाद में सुविधाएं व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं देते तो भारत की छवि खराब होती है।
वह अपने देश में भारत के संस्थानों के प्रति गलत धारणा बना लेते हैं। इसका असर दूसरे संस्थानों पर भी पड़ता है लेकिन यह व्यवस्था होने से ऐसा नहीं हो सकेगा।