वकालत के पेशे में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए वकीलों का सत्यापन कराया जा रहा है। इसके तहत वकीलों को अब हाईस्कूल और स्नातक कहां से किया इसका भी विवरण देना होगा।
ऐसा नहीं करने वाले वकीलों को बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड की ओर से प्रैक्टिस का सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा। बार काउंसिल ऑफ उत्तराखंड के विशेष कमेटी के सदस्य चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। सभी बार एसोसिएशनों को बार काउंसिल की तरफ से सत्यापन फार्म भेजे गए हैं।
बार काउंसिल आफ इंडिया की ओर से पारित नियम प्लेस ऑफ प्रैक्टिस वेरिफिकेशन रुल्स-2015 के तहत प्रदेश में इन दिनों लगभग 12,500 से अधिक अधिवक्ताओं का सत्यापन किया जा रहा है। एडवोकेट चंद्रशेखर तिवारी के मुताबिक सत्यापन का मुख्य उद्देश्य वकालत के पेशे को स्वच्छ बनाना है। सत्यापन से उन वकीलों को फायदा होगा जो पूरी तरह से वकालत से जुड़े हैं।
देखने में आया है कि कई अधिवक्ता विधि व्यवसाय से नहीं जुड़ने के बावजूद बार काउंसिल की योजनाओं का लाभ लेते हैं। ऐसे अधिवक्ताओं को अब रोल से बाहर कर नॉन प्रैक्टिशनर लिस्ट में शामिल किया जाएगा। इससे फर्जी तरीके से वकालत से जुडे़ अधिवक्ता खुद बाहर हो जाएंगे।
पहली बार हो रहा वकीलों का सत्यापन
वकालत के पेशे के लिए बार काउंसिल आफ इंडिया की ओर से 12 जून 2010 के बाद से आल इंडिया बार एग्जाम अनिवार्य किया गया है। इसके बाद से यह पहला मौका है जब सभी वकीलों का सत्यापन किया जा रहा है।
इसके दायरे में साल 2010 के पहले के सभी वकील आएंगे। वहीं, साल 2010 के उन वकीलों को भी सत्यापन करना होगा जिन्हें वकालत करते पांच साल हो गया है।