सिविल सर्विस एप्टीट्यूड टेस्ट (सीसैट) के मामले में भी उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की मनमानी जारी है। पहले तो एक ही साथ प्री और मेंस परीक्षा में सीसैट पैटर्न लागू किया गया।
अब संघ लोक सेवा आयोग के इस पैटर्न को क्वालीफाइंग करने के बावजूद प्रदेश के आयोग ने कोई राहत नहीं दी है। उत्तराखंड का सीसैट पहले से ही यूपीएससी के मुकाबले काफी मुश्किल माना जाता रहा है।
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने पीसीएस प्री परीक्षा कराई। इसमें सीसैट पैटर्न ने युवाओं के पसीने छुड़ाए। प्री के परिणाम आने के बाद तमाम ऐसे युवा सीसैट पैटर्न की वजह से बाहर हो गए, जो रीजनिंग और गणित के स्तर पर कमजोर थे। संघ लोक सेवा आयोग के सीसैट पैटर्न में अब 33 प्रतिशत क्वालीफाइंग अंक कर दिए गए हैं।
जबकि उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के सीसैट पैटर्न में अब तक कोई ऐसी राहत नहीं मिली है। प्रदेश में सीसैट में पूछे जाने वाले अंग्रेजी के सवालों को परिणाम में काउंट किया जाता है जबकि संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में अंग्रेजी के सवालों को नहीं जोड़ा जाएगा। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग में अंग्रेजी के सात सवालों को परिणाम में भी शामिल किया जाता है।
देश में कहीं नहीं, प्रदेश में मुख्य परीक्षा में मैथ्स
प्रदेश की पीसीएस परीक्षा में काफी मुश्किलें हैं। यहां दो घंटे का पहला प्रश्नपत्र 150 सवालों का होता है, जबकि यूपीएससी में पहला प्रश्नपत्र 100 सवालों का होता है। दूसरा प्रश्न पत्र उत्तराखंड पीसीएस में 100 सवालों का होता है जबकि यूपीएससी में दूसरा प्रश्नपत्र 80 सवालों का होता है।
मुख्य परीक्षा के सातवें पेपर में एथिक्स और एप्टीट्यूड है। इस पेपर में मैथ्स के कठिन सवाल पूछे जाते हैं। इस पेपर में 80 अंकों की इथिक्स आती है जबकि 120 अंकों का गणित। यूपीएससी सहित देश के तमाम राज्यों में मुख्य परीक्षा में मैथ्स नहीं है।
देश के किसी भी राज्य में मुख्य परीक्षा में मैथ्स नहीं होता है। यूपीएससी की मुख्य परीक्षा में भी नहीं होता है लेकिन उत्तराखंड पीसीएस की मुख्य परीक्षा में सातवें पेपर में मैथ्स होता है। आयोग को मैथ्स हटाकर उत्तराखंड जोड़ना चाहिए।
- आरए खान, निदेशक, प्रयाग आईएएस एकेडमी
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