शिक्षकों की कमी, प्रयोगशालाओं-उपकरणों और बुनियादी संसाधनों का अभाव सरकारी माध्यमिक स्कूलों से छात्रों की रुचि भंग कर रहे हैं।
शायद यही वजह है कि इस वर्ष उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में पिछले साल के मुकाबले परीक्षार्थियों की संख्या चार हजार घट गई है। शिक्षा विशेषज्ञ इसे सरकारी हाईस्कूलों के लिए खतरे की घंटी मानते हैं।
पीपीपी मोड पर देने की योजना
प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में तो छात्रों की संख्या पिछले कुछ वर्षों से लगातार घट रही है। पिछले दो साल में पूरे प्रदेश में 50 हजार से अधिक बच्चे सरकारी प्राइमरी स्कूल छोड़ आलम यह है कि दर्जनों स्कूल बंद हो चुके हैं और कई बंदी के कगार पर हैं। बच्चों की संख्या घटती देख सरकार ने इन्हें पीपीपी मोड पर देने की योजना बनाई है।
लेकिन, अब प्राथमिक स्कूलों का असर माध्यमिक स्तर पर भी नजर आने लगा है। हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में छात्र बढ़ने के बजाए घटते जा रहे हैं।
वर्ष 2012-13 में जहां एक लाख 78 हजार 738 बच्चों ने हाईस्कूल की बोर्ड की परीक्षा दी, वहीं इस बार एक लाख 74 हजार 835 परीक्षार्थी हाईस्कूल की बोर्ड की परीक्षा दे रहे हैं। वर्ष 2009 में एक लाख 73 हजार 62 बच्चों ने हाईस्कूल परीक्षा दी थी। इस लिहाज से देखें तो वर्ष 2013 में इस संख्या में सिर्फ 1773 का इजाफा हुआ है।
कहां जा रही अरबों की रकम
शिक्षा विभाग का बजट वर्ष 2013-14 में करीब 3700 करोड़ रुपये था। वहीं, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान का वर्ष 2014-15 का प्रस्तावित बजट 450 करोड़ है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर अरबों रुपये खर्च करने का दावा करने वाला शिक्षा विभाग बच्चों की संख्या क्यों नहीं बढ़ा पा रहा।
प्रदेश में पकड़े गए पांच और नकलची
उत्तराखंड विद्यालय शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में शुक्रवार को पांच नकलची पकड़े गए। अब तक धरे गए नकलचियों की कुल संख्या 13 हो गई है।
शुक्रवार को हाईस्कूल का सामाजिक विज्ञान और इंटरमीडिएट का गणित व गृह विज्ञान का पेपर था। इसमें हाईस्कूल में अल्मोड़ा में दो संस्थागत छात्र व पौड़ी में एक छात्र नकल करता पकड़ा गया।
इसके अलावा इंटरमीडिएट में हरिद्वार में एक और पौड़ी में एक संस्थागत छात्र पकड़ा गया।
इनसे बढ़ी दिक्कत
शिक्षकों के मनमाने तबादले
दुर्गम स्कूलों में शिक्षकों का अभाव
हर शिक्षक की सुगम में आने की चाहत
स्कूलों में लैब, संसाधनों का अभाव
जर्जरहाल विद्यालय भवन