हिमाचल प्रदेश के जिन सरकारी प्राथमिक स्कूलों में मुस्लिम समुदाय के कम से कम दस बच्चे पढ़ रहे हैं, वहां अब पहली कक्षा से उर्दू पढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम के निदेशक लियाकत खान ने बताया कि मौजूदा समय में उर्दू विषय प्रदेश के केवल चुनिंदा शहरों में ही पढ़ाया जा रहा है।
जबकि छठी, सातवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को रुचि अनुसार ही यह विषय पढ़ाया जाता है। उर्दू पढ़ाने वाले शिक्षकों को पीरियड के आधार पर वेतन दिया जाता है। उन्होंने अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड की बैठक में इस मुद्दे को उठाया था। जिसके बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने उर्दू पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए आरएंडपी नियम में बदलाव करने का निर्णय लिया है।
वहीं सरकार की ओर से इसमें रियायत देकर उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति के लिए योग्यता बारहवीं पास और उर्दू विषय में डिप्लोमा किए जाने का सुझाव आया है। अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड की बैठक में लियाकत खान की ओर से उठाए गए मुद्दे पर चर्चा के दौरान सरकार द्वारा निर्णय लिया गया कि मुस्लिम और गुज्जर समुदाय के बच्चे मात्र इस्लामिक शिक्षा के लिए मदरसों का रुख न करके सरकारी प्राथमिक स्कूलों में उर्दू विषय सहित अन्य विषयों का भी ज्ञान प्राप्त करेंगे।