उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी (यूपीटीयू) के प्रदेश में संचालित 302 इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए आरक्षित जेईई मेन की सीटों में बढ़ोतरी हो सकती है।
टेक्निकल इंस्टीट्यूशंस फाउंडेशन ने इस कोटे के तहत 10 फीसदी सीट बढ़ाने की मांग की है। दूसरे राज्य के छात्रों को मौका देने के लिए इस कोटे में डोमिसाइल नियम को भी खत्म करने की मांग की गई है। विवि इस पर विचार कर केंद्रीय प्रवेश समिति की बैठक में प्रस्ताव रखेगा।
दरअसल प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में लगभग डेढ़ लाख सीटें हैं। यूपी-एसईई (स्टेट एंट्रेंस एग्जाम) के मौजूदा प्रावधान में बीटेक की 65 फीसदी सीटें यूपीटीयू एसईई काउंसलिंग, 20 फीसदी सीट जेईई मेन की रैंकिंग पर (लगभग 30 हजार सीट) और 15 फीसदी सीट मैनेजमेंट कोटा के आधार पर भरी जाती है।
जेईई मेन के इस कोटे में 10 फीसदी सीट स्टेट रैंक (यूपी डोमिसाइल) और 10 फीसदी नेशनल रैंक से भरने का प्रावधान है।
निजी कॉलेजों की मांग है कि जेईई मेन की सीटों का कोटा 30 फीसदी (लगभग 45 हजार सीट) करते हुए सभी सीटें ओपन रैंक पर भरी जाए ताकि दूसरे राज्यों के छात्रों को भी ज्यादा से ज्यादा मौका मिल सके।
जेईई मेन कोटा के मौजूदा प्रावधान में यूपी के छात्रों के पास दाखिले की अच्छी मेरिट के दो मौके रहते हैं। नियम बदला तो सिर्फ एक ही मौका रहेगा।
यूपी एसईई में आवेदन बढ़ाने और इंजीनियरिंग कॉलेजों में ज्यादा से ज्यादा एडमिशन करने के लिए ये योजनाएं बनाई जा रही हैं।
यूपीटीयू के रजिस्ट्रार यूएस तोमर के मुताबिक निजी कॉलेजों ने जेईई मेन की दस फीसदी सीट बढ़ाने की मांग की है, प्रस्ताव को केंद्रीय प्रवेश समिति की बैठक में रखा जाएगा।