42 कॉलेजों को फर्जी तरीके से मान्यता देने वाले उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) के पूर्व रजिस्ट्रार यूएस तोमर को निलंबित कर दिया गया है।
विवि की जांच कमेटी की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री ने तोमर को दोषी मानते हुए बृहस्पतिवार को यह कार्रवाई की।
प्राविधिक शिक्षामंत्री शिवाकांत ओझा के अनुसार तोमर की नियुक्ति संबंधी मामले की जांच भी जल्द पूरी कर ली जाएगी।
इस मामले में कुलपति प्रो. आरके खांडल ने पूर्व न्यायाधीश आलोक सिंह की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई थी। इस कमेटी ने तोमर को दोषी बताते हुए कुछ दिन पहले ही अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी थी।
बनी थी सचिव स्तर की जांच समिति
यूपीटीयू के पूर्व रजिस्ट्रार यूएस तोमर के खिलाफ हुई कार्रवाई में प्राविधिक शिक्षा राज्य मंत्री राम शकल गुर्जर के पत्र का विशेष योगदान है।
प्राविधिक शिक्षा राज्य मंत्री राम शकल गुर्जर ने दिसंबर 2013 को शासन को पत्र लिखा था। इसके बाद विशेष सचिव स्तर की जांच समिति बनाई गई थी।
इस दौरान तीन बार विशेष सचिव का तबादला होने के कारण जांच थोड़ी बाधित हुई।
इसके बावजूद चारों तरफ बने दबाव और जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर यूएस तोमर को निलंबित कर दिया गया। अब जल्द से जल्द शासन स्तर पर भी जांच पूरी करने की बात कही जा रही है।
तोमर पर ये हैं आरोप
1- कॉलेजों की संबद्धता के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय तारीख 15 मई 2013 के बावजूद जानबूझकर देरी करना और तिथि के बाद मान्यता जारी करना। इससे चार हजार छात्रों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया था। अदालत के आदेश के बाद इन छात्रों को परीक्षा देने को मिली थी।
2- संबद्धता मामले में कॉलेजों द्वारा दायर केस में विश्वविद्यालय की ओर से काउंटर दाखिल करने में जानबूझकर देरी करना।
3- संबद्धता के समय विश्वविद्यालय की फर्जी वेबसाइट बनाना और अलग खाता खुलवाकर उसमें नौ करोड़ रुपए जमा करवाना।