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अपना ही रिपोर्ट कार्ड नहीं बना पा रहे कॉलेज!

Wed, 04 Dec 2013 11:17 AM IST
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
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यूपीटीयू की एक अच्छी पहल इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, आर्किटेक्चर और फॉर्मेसी कॉलेजों के फेर में परवान नहीं चढ़ पा रही है।
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यूपीटीयू ने पहली बार इनोवेशन एंड एक्सीलेंस इन टेक्निकल एजुकेशन अवॉर्ड की शुरुआत की है।

इसका मकसद है कि रिसर्च, रिजल्ट, इनोवेशन, प्लेसमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वालिटी एजुकेशन जैसे बिंदुओं पर अंक देकर बेहतर प्रदर्शन करने वाले कॉलेजों को अवॉर्ड दिया जाए। इसके लिए बीते 28 सितंबर को सभी कॉलेजों से इंट्री मांगी गई थी।

लेकिन कॉलेजों को अपना ही रिपोर्ट कार्ड बताने में सांसें फूल रही हैं। हालत यह है कि अब तक 850 कॉलेजों में से मात्र 100 कॉलेजों ने ही अपना ब्यौरा भेजा है। ऐसे में इंट्री की तारीख एक बार फिर बढ़ाकर 15 दिसंबर की गई है।
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इनोवेशन एंड एक्सीलेंस इन टेक्निकल एजुकेशन अवॉर्ड के तहत पांच कैटेगरी इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, आर्किटेक्चर व फॉर्मेसी कॉलेजों को प्लेटिनम, गोल्ड, सिल्वर व ब्रांज अवॉर्ड दिए जाने हैं।

मंशा है कि जब कॉलेजों को यह अवॉर्ड दिया जाए तो दूसरे कॉलेज इससे प्रेरित होकर अपना प्रदर्शन सुधारने की कोशिश करेंगे। मगर यहां तो कॉलेज अपनी परफॉर्मेंस रिपोर्ट ही बताने से कतरा रहे हैं।

पहले 28 सितंबर से 30 अक्तूबर के बीच कॉलेजों को अपनी इंट्री भेजनी थी। पहले नेशनल यूपी टेक्निकल समविट 2013 की तारीख 23 नवंबर निर्धारित की गई थी लेकिन कॉलेजों की कम इंट्री को देखते हुए कार्यक्रम को आगे बढ़ा दिया गया।

इसके बाद कॉलेजों को 30 नवंबर तक अपनी इंट्री भेजने को कहा गया। मगर अभी तक मात्र 100 कॉलेज ही परफॉर्मेंस का ब्यौरा भेजा है।

ऐसे में एक बार फिर इंट्री भेजने की तारीख 15 दिसंबर तक बढ़ाई गई है। 17 दिसंबर को होने वाले समविट की तारीख भी आगे बढ़ा दी गई है।

प्रोफॉर्मा भरने में हांफ गए अच्छे-अच्छे कॉलेज
नोएडा में स्थित एक ऐसा इंजीनियरिंग कॉलेज जिसकी गिनती अच्छे कॉलेजों में की जाती है, वह भी 29 बिन्दुओं पर यूपीटीयू को अपनी परफॉर्मेंस रिपोर्ट नहीं दे पाया।

उसने सिर्फ 50 प्रतिशत प्रोफॉर्मा भरकर बाद में जमा करने की मोहलत मांगी। जब उसे गाइड किया गया तो वह जैसे-तैसे अपना पूरा फॉर्म भरकर भेज पाया।

दरअसल इंजीनियरिंग कॉलेज अभी केवल स्टूडेंट का दाखिला लेने और उन्हें डिग्री देने को ही अपना काम समझते हैं। पहली बार ऐसी योजना शुरू की गई तो उनके हाथ-पांव फूल गए।

इन बिन्दुओं पर देना है जवाब
कॉलेजों को अवार्ड के लिए 29 बिन्दुओं वाला प्रोफॉर्मा भरना है। इसमें उन्हें विजन एंड मिशन स्टेटमेंट, फ्यूचर प्लॉन, प्लॉन ऑफ रिसर्च एंड इनोवेशन, कितने प्रोग्राम चल रहे है कितने स्टूडेंट हैं।

इंफ्रास्ट्रक्चर कैसा है, लाइब्रेरी में कितनी किताबें हैं और क्या-क्या सुविधाएं हैं, कितने प्रोग्राम का एआईसीटीई से एग्रीडेशन करवाया है।

कंप्यूटर सेंटर में सुविधाएं, कॉलेज के केन्द्र व राज्य सरकार से अनुदान लेने, यूजीसी से अनुदान व कितनी कंसलटेंसी की और कहां-कहां के रिसर्च प्रोजेक्ट हासिल किए।

फैकल्टी के बारे में पूरी डिटेल और रिसर्च डेवलपमेंट में क्या-क्या किया। कितनी बुक्स छपी और कितनी बुक्स गूगल स्कॉलर पर सूचीबद्ध हुईं। इनोवेशन में क्या किया।
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कितने एमओयू साइन किए, इंडस्ट्री से मिलकर कितने प्रोग्राम चलाए, टीचर्स का अप्रेजल स्टूडेंट्स से भरवाया या नहीं, टीचिंग लर्निंग प्रॉसेस में कितना इनोवेशन किया, पढ़ाई में कमजोर स्टूडेंट्स के लिए क्या किया, रिजल्ट, प्लेसमेंट में क्या-क्या किया आदि बिन्दुओं पर जवाब भरना है।
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