यूपी पीजी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (यूपीपीजीएमईई) में अमान्य सीटों को काउंसलिंग में शामिल कराने के लिए अभ्यर्थी अड़े हुए हैं।
अपनी मांग को लेकर अभ्यर्थियों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को मंत्री अंबिका प्रसाद और महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (डीजीएमई) डॉ. केके गुप्ता से मिला।
छात्रों का कहना है कि मंत्री स्तर से उन्हें अमान्य सीटें शामिल कराने का आश्वासन मिला है। हालांकि अभी इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
सोमवार को पीजी की दूसरे चरण की काउंसलिंग को एक दिन के लिए टाल दिया गया। अपनी मांग को लेकर इसके बाद एक प्रतिनिधिमंडल मंत्री अंबिका प्रसाद से उनके आवास पर मिला।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल डॉ.राजीव गुप्ता ने बताया कि उन्होंने प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा जेपी शर्मा से इन सीटों को शामिल कराने की बात कही है।
देर शाम ये अभ्यर्थी डीजीएमई डॉ. केके गुप्ता से मिले। अभ्यर्थियों ने बताया कि डीजीएमई ने मुख्य सचिव से आदेश मिले बिना किसी निर्णय के लिए इन्कार किया है।
उनका कहना है कि अगर शासन से आदेश मिले तो वह अमान्य सीट को काउंसलिंग में शामिल करा सकते हैं।
डॉ. राजीव का कहना है कि हमारी मांग है कि 73 अमान्य सीटों को काउंसलिंग में शामिल कर लिया जाए।
इससे यूपी में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी। वहीं, अभ्यर्थियों को भी फायदा होगा।
नियमानुसार एमसीआई से अनुमति नहीं मिलने पर पीजी की सीट को अमान्य घोषित कर दिया जाता है।
इन सीटों पर मेडिकल कॉलेज प्रवेश दे सकते हैं, लेकिन इन्हें केवल स्टेट मेडिकल काउंसिल से ही रजिस्ट्रेशन मिल सकता है।
एमसीआई ऐसे छात्रों को मान्यता नहीं देता। ये प्रेक्टिस भी केवल यूपी में ही कर सकते हैं।