क्वींस इंटर कॉलेज में जीव विज्ञान के शिक्षक एच. जोशी पिछले साल रिटायर हो चुके हैं।
इस साल उनका नाम यूपी बोर्ड की परीक्षकों की सूची में शामिल है। वे कॉपी जांचने जाएं या नहीं ये उनकी मर्जी पर निर्भर है।
अनुपस्थित रहने पर विभाग उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है।
एच. जोशी की ही तरह गांधी उच्चतर विद्यालय अमावां के शिक्षक पीएन द्विवेदी, लखनऊ मांटेसरी स्कूल के शमशुद्दीन समेत कई ऐसे शिक्षक हैं।
जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं पर इनका नाम बराबर परीक्षकों की सूची में शामिल रहता है। माध्यमिक शिक्षा परिषद के नियमों के हिसाब से ये शिक्षक कॉपी जांचने के लिए अधिकृत हैं।
लेकिन अनुपस्थित न रहने पर इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है। यूपी बोर्ड के मूल्यांकन में इस साल मुश्किल से 50 फीसदी परीक्षक ही उपस्थित हुए हैं।
इस कारण तय समय में उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन होना संभव नहीं है। इसके लिए यूपी बोर्ड भी कम जिम्मेदार नहीं है। असल में बोर्ड की ओर से परीक्षकों की जो सूची भेजी गई है, वो तीन साल पुरानी है।
सूची में बहुत से ऐसे शिक्षकों के नाम हैं, जो रिटायर हो चुके हैं।
राजकीय इंटर कॉलेज के कई शिक्षकों का तबादला दूसरे जिलों में हो चुका है। सबसे बुरी स्थिति में निजी विद्यालय हैं, जहां आए दिन शिक्षक दूसरी जगह जाते रहते हैं।
अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों में अच्छी खासी संख्या इस तरह के शिक्षकों की भी है।
सेवानिवृत्त शिक्षकों को बोर्ड के नियम कॉपी जांचने की इजाजत है पर कॉपी जांचना या न जांचना उनकी मर्जी पर निर्भर करता है।
शिक्षा अधिकारी भी बोर्ड की इस व्यवस्था से परेशान हैं लेकिन मामला बोर्ड से जुड़ा होने के कारण सीधे तौर पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।