यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के रेगुलेशन-2010 के प्रावधानों को लागू करते हुए उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में रीडर और लेक्चरर का चलन खत्म कर दिया गया है।
इससे कई युवा चहरों का रंग उड़ गया है। लेकिन इसमें घबराने की कोई बात नहीं है। दरअसल, रीडर को अब एसोसिएट प्रोफेसर और लेक्चरर को असिस्टेंट प्रोफेसर का पदनाम दे दिया गया है।
प्रदेश के राज्यपाल ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए संशोधन के आधार पर उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अध्यादेश-2013 को लागू कर दिया है।
चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी (सीसीएसयू) ने नए प्रावधानों को लागू करने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश-2013 में लेक्चरर और रीडर की जगह असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर पदनाम कर दिया गया है।
यह भी पढ़ें: गूगल मैप के फेर में फंस सकता है एडमिशन
प्रोवीसी नियुक्त करना भी जरूरी होगा, जो कि विश्वविद्यालय का फुलटाइम प्रोफेसर होगा। अध्यादेश की धारा-31 में संशोधन करते हुए यह प्रावधान किया गया है कि संबंधित कॉलेज, एसोसिएटेड कॉलेज या सेल्फ फाइनेंस कॉलेज में प्रिंसिपल की नियुक्ति एक चयन समिति करेगी।
इसमें वीसी द्वारा नामित एजुकेशन एक्सपर्ट भी शामिल होगा। अब लाइब्रेरियन, डिप्टी या असिस्टेंट लाइब्रेरियन की नियुक्ति भी चयन समिति करेगी। धारा-35 के संशोधन के मुताबिक किसी शिक्षक को हटाने, दंडित करने या डिमोशन करने के लिए किसी भी कॉलेज के प्रबंधन के अपने स्तर पर नहीं होगा।
यह भी पढ़ें: नोएडा में है एशिया का बेस्ट प्राइवेट इंस्टीट्यूट
इसके लिए वीसी को जानकारी उपलब्ध कराते हुए उनका अनुमोदन जरूरी होगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश के विशेष सचिव द्वारा जारी आदेश को सीसीएसयू ने सभी विभाग और उनके प्रभारियों को जारी कर दिया है।