विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी विश्वविद्यालयों को अब छात्र को कोर्स पूरा करने के लिए एक साल अतिरिक्त देने की छूट दी है। यूजीसी के इस फैसले से छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी।
देशभर के विश्वविद्यालयों में निर्धारित समयावधि में पढ़ाई पूरी न कर पाने वाले छात्रों को अब एक अतिरिक्त साल पढ़ने के लिए मिलेगा। कई विदेशी विश्वविद्यालयों में यह प्रावधान है कि अगर छात्र निर्धारित समयावधि में कोर्स पूरा नहीं कर पा रहा है तो उसे अंतिम मौका दिया जाना चाहिए।
इसे लेकर यूजीसी ने एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी। कमेटी की सिफारिश देशभर के कुलपतियों को भेज दी गई हैं। इसके मुताबिक अगर दो वर्षीय पीजी कोर्स को छात्र चार साल में पूरा नहीं कर पा रहा है तो उसे एक अतिरिक्त साल पास होने के लिए दिया जा सकता है।
इसी प्रकार तीन वर्षीय यूजी कोर्स को अगर छात्र पांच साल में पूरा नहीं कर पा रहा है या फिर चार वर्षीय कोर्स को सात साल में पूरा नहीं कर पा रहा है तो उसे भी एक अतिरिक्त साल दिया जा सकता है। यूजीसी के लिए इस फैसले से कई वजहों से निर्धारित समय में कोर्स पूरा न कर पाने वाले युवाओं को बड़ी राहत मिलेगी।
उत्तराखंड तकनीकी विवि के परीक्षा नियंत्रक डॉ. आशीष उनियाल ने बताया कि यूजीसी के इन निर्देशों से बड़ी राहत होगी। बताया कि यह फैसला विवि के पास होगा। यह भी कहा कि इस एक अतिरिक्त साल से परीक्षा देने वाले छात्र को बतौर प्राइवेट ट्रीट किया जाएगा और अगर वह मेरिट में आता भी है तो गोल्ड मेडल के लिए दावा पेश नहीं कर पाएगा।
कोर्स - पहले समयावधि - अब समयावधि
पीजी कोर्स - 4 साल - 5 साल
यूजी कोर्स - 5 साल - 6 साल
बीटेक - 7 साल - 8 साल
नोट : समयावधि अधिकतम में है। छात्र का इतने समय में कोर्स पूरा करना अनिवार्य है।