यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) अब अगले सत्र से एमफिल और पीएचडी छात्रों को नॉन-नेट रिसर्च स्कॉलरशिप नहीं देगी। वहीं, यूजीसी के नॉन नेट फेलोशिप खत्म करने का विरोध विश्वविद्यालयों में शुरू हो गया है।
यूजीसी के इस फैसले के विरोध डीएसएफ ने जेएनयू छात्रसंघ के साथ मिलकर विरोध की कॉल की है। इस मुद्दे पर छात्र समेत संगठन यूजीसी के बाहर विरोध भी दर्ज करवाएंगे।
डीएसएफ के पदाधिकारी व पूर्व जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष वी लेनिन कुमार के मुताबिक, अभी तक एमफिल व पीएचडी छात्रों को नॉन-नेट रिसर्च स्कॉलरशिप मिलती है। इसके तहत एमफिल के छात्रों को प्रति महीना पांच हजार और पीएचडी छात्रों को आठ हजार रुपये मिलते हैं।
केंद्रीय विश्वविद्यालयों के हजारों गरीब तबके के छात्र इसी फेलोशिप के माध्यम से अपने हॉस्टल से लेकर अन्य खर्चे पूरे करते थे। लेनिन के मुताबिक, मोदी सरकार छात्र विरोधी नीति के तहत यह सब कर रही है।
फेलोशिप की राशि बढ़ानी चाहिए थी, लेकिन यहां तो बंद कर दी गई। उधर, आइसा ने भी इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है।