यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के एक फैसले ने डीयू के हजारों छात्रों का भविष्य अनिष्चित कर दिया है। खबर है कि यूजीसी ने अपने एक निर्देश में दिल्ली यूनिवर्सिटी को तत्काल रूप से अपने विवादास्पद चार साल के डिग्री प्रोग्राम (एफवाईयूपी) को वापस लेने के लिए कहा है।
यूजीसी का फैसला उस वक्त आया है जब राजग सरकार को सत्ता में आए करीब एक महीने हो गए हैं। भाजपा ने अपने मेनिफेस्टो में ये वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद वो एफवाईयूपी को वापस लेगी और बीजेपी का छात्र संगठन तो इसे वापस लेने के लिए शुरू से ही धरना प्रदर्शन कर रहा है।
FYUP राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लंघन करता है
इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार यूजीसी ने शुक्रवार को डीयू को कहा है कि एफवाईयूपी प्रोग्राम शिक्षा की राष्ट्रीय नीति 10+2+3 का उल्लंघन करता है।
सूत्रों के अनुसार डीयू प्रशासन को ये भी अवगत कराया गया है कि यूनिवर्सिटी एफवाईयूपी को लागू कर सकने वाले संशोधित अध्यादेश पर विजिटर की सहमति प्राप्त नहीं कर सकी है।
आपको बता दें कि देश के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विजिटर राष्ट्रपति हैं। इसके साथ ही डीयू 2013 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एफवाईयूपी के बारे में पूछे गए सवालों का भी जवाब देने में नाकाम रही है।
FYUP है असंवैधानिक
13 जून को दिल्ली में दिल्ली में हुई यूजीसी की बैठक में ये चर्चा हुई थी कि एफवाईयूपी यूनिवर्सिटी एक्ट में संशोधन के बिना लागू किया गया है इसलिए ये अवैधानिक है।
इसी बैठक में डीयू को एफवाईयूपी का पुनरावलोकन करने को कहा गया था। कहा जा रहा है कि यूजीसी के निर्णय को एचआरडी मंत्री स्मृति इरानी का समर्थन प्राप्त है जो छात्रों के हितों के रक्षा की बात करती रही हैं।
अगर एफवाईयूपी को वापस लिया गया तो ये डीयू के वाइस चांसलर प्रो. दिनेश सिंह के लिए एक करारा झटका होगा जिन्होंने इस प्रोग्राम को विश्वविद्यालय के शिक्षक समूह के कड़े विरोध के बाद भी लागू किया था।
डीयू में हंगामे के आसार
डीयू में एफवाईयूपी को लेकर शिक्षक और छात्र संगठन अब आरपार की लड़ाई के मूड में हैं। शनिवार का दिन कैंपस में विरोध प्रदर्शन के नाम रहने वाला है। बैठक में एफवाईयूपी को एजेंडे में शामिल न करने को लेकर और यूजीसी की ओर से एफवाईयूपी को अवैध बताए जाने के बाद भी इस को वापस नहीं लेने पर संगठनों का विरोध होगा।
वहीं, बैठक में एफवाईयूपी से संबंधित कोर्स को पास कराए जाने के लिए रखा जा रहा है। अगर कोर्स पास हो जाते हैं तो एफवाईयूपी को लेकर विश्वविद्यालय का रुख साफ होगा। वामपंथी संगठनों से जुड़े शिक्षक संगठनों के सदस्यों की ओर से बैठक में विरोध किए जाने के आसार हैं।
ऐसी संभावना है कि यह सभी कोर्स अब एकेडमिक काउंसिल में पास हो जाएंगे, जहां से इन्हें मंजूरी के लिए एग्जीक्यूटिव काउंसिल में भेजा जाएगा। डूटा, आइसा और एबीवीपी ने विरोध को लेकर अपना एक्शन प्लान तैयार किया है। वहीं, एनएसयूआई भी कैंपस में वीसी व मानव संसाधन विकास मंत्री के विरोध में प्रदर्शन करने जा रही है।