एलयू में लॉ परीक्षा में सात कापियां ट्रांसप्लांट करने के मामले से पर्दा
उठाने में खुद परीक्षा विभाग लापरवाह है।
एक महीना बाद भी अब तक अनफेयर
मीन्स (यूएफएम) कमेटी की बैठक नहीं हो पाई है।
जबकि लॉ परीक्षा की प्रभारी
डॉ. विनीता कॉचर ने इस प्रकरण की रिपोर्ट परीक्षा विभाग को महीने भर पहले
भेज दी थी।
आरोप है कि एलएलबी आनर्स तृतीय वर्ष के छात्र राजकपूर रावत की
ओर से जमा कॉपी पर क्रमांक दूसरे सभी छात्रों को कोडिंग के बाद दी गई कापी
के क्रमांक से भिन्न है। इससे पहले भी दो मामलों में यूएफएम कमेटी की
रिपोर्ट अभी नहीं आयी है।
इस गड़बड़ी पर
राजकूपर का रिजल्ट रोक दिया गया है और उसे सात पेपरों में यूएफएम घोषित कर
दिया गया है। अब परीक्षा विभाग द्वारा बनाई गई कमेटी को इस मामले का
निस्तारण करना है।
इसमें यूनिवर्सिटी द्वारा दी गई रिपोर्ट पर छात्र को
अपना पक्ष रखना होगा। एलयू के परीक्षा नियंत्रक प्रो. एके शर्मा का कहना है
कि कापी ट्रांसप्लांट करने की रिपोर्ट के बारे में अभी उन्हें पता नहीं
है।
अब मामला उनके सामने आया है तो वह पता लगाएंगे कि यूएफएम कमेटी की बैठक
होने में क्यों देरी हो रही है। रिपोर्ट पर कार्रवाई में देरी करने का
एलयू की यूएफएम कमेटी का यह पहला मामला नहीं है।
कई बार तो एक-एक सेमेस्टर
की पढ़ाई पूरी हो जाती है और कमेटी की रिपोर्ट नहीं आ पाती।
बीते महीनों
में लॉ की परीक्षा में नकल करते पकड़े गए स्वतंत्र मिश्रा के मामले में भी
अभी तक कोई अंतिम कार्रवाई नहीं हो पाई है।
इसी तरह मॉस कम्युनिकेशन इन
साइंस में नकल करते पकड़े गए कर्नल के मामले में भी कमेटी की रिपोर्ट नहीं
आई है।
सवालों के घेरे में छात्र और एलयूछात्र
राजकपूर का अभी भी दावा है कि उसने कॉपी नहीं बदली बल्कि एलयू ने खुद गलती
से उसे दूसरे क्रमांक की कापी दे दी। इसे वह कमेटी की बैठक में प्रूफ भी
कर देगा।
मगर पूरे सात पेपरों में कॉपियां अलग क्रमांक की मिलना बड़ा सवाल
खड़ा करती हैं। सवाल यह भी है कि आखिर इतनी आसानी से एक छात्र ने सात-सात
पेपर की कापियां कैसे बदल ली।
यूनिवर्सिटी के पूरे एग्जाम सिस्टम पर भी
इससे सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में यूएफएम कमेटी की रिपोर्ट कापी
महत्वपूर्ण होगी।