हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा बोर्ड से डिप्लोमा का प्रशिक्षण ले रहे वर्ष 2013 बैच के प्रशिक्षु मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के पास चक्कर काट रहे हैं। प्रदेश सरकार और तकनीकी शिक्षा बोर्ड के नियमों के फेर में फंसे प्रशिक्षुओं ने उनके बैच से 50 फीसदी पेपर पास करने की शर्त हटाने और कक्षा में 75 फीसदी उपस्थिति में छूट मांगी है।
वे तकनीकी शिक्षा मंत्री जीएस बाली और मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मिल चुके हैं, लेकिन राहत नहीं मिल रही है। प्रदेश तकनीकी शिक्षा बोर्ड ने वर्ष 2013 बैच के करीब ढाई हजार प्रशिक्षुओं के 50 फीसदी पेपर और 75 फीसदी कक्षा में उपस्थिति की शर्त पूरी न होने पर परिणाम रोका है।
प्रशिक्षुओं की मांग के बाद सरकार के आदेशों पर बोर्ड ने इनका परिणाम घोषित कर दिया, लेकिन उस समय प्रशिक्षुओं की संघर्ष समिति ने सरकार और बोर्ड से वर्ष 2013 बैच से हर सेमेस्टर में 50 फीसदी पेपर पास करने की शर्त को हटाने की मांग की है। संघर्ष समिति के सदस्य ऊना में सीएम से मिल चुके हैं। सोमवार को भी मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें समय नहीं मिल पाया। अब मंगलवार का समय प्रशिक्षुओं को मिला है।
यहां मेरिट और शून्य एक बराबर
हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा बोर्ड से डिप्लोमा का प्रशिक्षण लेने को पैट (पॉलीटेक्निकल एंट्रेंस टेस्ट) लिया जाता है। संघर्ष समिति का आरोप है कि पैट की मेरिट में आने वाले प्रशिक्षुओं को आसानी से एडमिशन मिलती है, लेकिन ऐसा नहीं है कि शून्य अंक लेने वालों को एडमिशन न मिले। उन्हें भी प्राइवेट कालेजों में प्रवेश मिल जाता है। फिर पैट का क्या औचित्य रह जाता है।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष विशाल शर्मा ने बताया कि परिणाम घोषित होने के बाद इस शर्त पर आंदोलन स्थगित किया था कि उनके बैच से 50 फीसदी पेपर पास करने की शर्त भी हटाई जाए। उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो समिति फिर आंदोलन करेगी।