प्रदेश विश्वविद्यालय के फीस बढ़ोतरी के फैसले का प्रदेश भर में विरोध हो रहा है। तीनों छात्र संगठनों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इस बीच, शनिवार को एसएफआई ने कुलपति को अपनी आपत्तियां और लिखित सुझाव सौंप दिए हैं।
एनएसयूआई और एबीवीपी ने अपनी आपत्तियां दर्ज नहीं करवाई हैं। फीस बढ़ोतरी के खिलाफ तीनों छात्र संगठनों के विरोध को देखते हुए कुलपति ने संगठन प्रतिनिधियों से अपनी आपत्तियां और सुझाव देने को कहा था। यह बैठक तीन सितंबर को हुई थी।
एसएफआई ने उस दिन भी फीस बढ़ोतरी और एससीए चुनाव पर प्रतिबंध के दोनों फैसलों को वापस करने की मांग की थी। इसे वापस लेने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर दिया था। एनएसयूआई और एबीवीपी ने भी फीसों में की बढ़ोतरी का विरोध कर फैसला वापस लिए जाने की मांग को कुलपति के समक्ष उठाया था।
तीन दिन में मांगी गई आपत्तियों और सुझाव की समयसीमा शनिवार को समाप्त हो गई। कुलपति के लिखित में यह सब मांगने से उम्मीद लगाई जा रही थी कि विवि बढ़ाई गई फीसों में कुछ संशोधन कर इसे कम करने के मूड में है। अब तीनों संगठन कब तक लिखित में आपत्तियां दर्ज करेंगे यह भी साफ नहीं है।
एक रुपये फीस बढ़ोतरी भी मंजूर नहीं
एसएफआई की विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष सुरेश कुमार और सचिव होशियार सिंह ने कुलपति को फीस बढ़ोतरी पर अपनी आपत्ति और सुझाव लिखित में सौंप दिए हैं।
तीन सितंबर को कुलपति की ओर से बुलाई गई बैठक में अपनी आपत्ति दर्ज करने को कहे जाने पर संगठन नेताओं ने लिखित में फीस बढ़ोतरी को छात्र विरोधी फैसला करार देते हुए फीस में एक रुपये की बढ़ोतरी न किए जाने की मांग की है।