सीटें न भरे जाने के कारण एलयू में तीन कोर्स पूरी तरह दम तोड़ गए। खास बात यह है कि यहां के पूर्व छात्र 90 वर्षीय डॉ. गिरी लाल गुप्ता ने करोड़ों रुपये खर्च कर मास्टर इन पब्लिक हेल्थ, डिप्लोमा हेल्थ एंड हाईजीन और डिप्लोमा इन वेलनेस टूरिज्म शुरू कराया था।
जिसमें केवल मास्टर पब्लिक हेल्थ कोर्स चल रहा है। दूसरी ओर, डॉ. शंकर दयाल शर्मा इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी में डिप्लोमा इन डेमोक्रेसी एंड गर्वेंस भी एक सत्र के बाद ही बंद हो गया।
स्टूडेंट्स के हित में की गई पहल विफल होती देख डॉ. गिरी लाल ने कुलपति डॉ. एसबी निमसे से मुलाकात भी की लेकिन नतीजा सिफर ही रहा।
लखनऊ विश्वविद्यालय में डॉ. गिरी लाल गुप्ता और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने वर्ष 1936 से लेकर 1940 तक महमूदाबाद हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की।
दोनों की दोस्ती उन दिनों एक मिसाल थी। डॉ. गिरी लाल गुप्ता ने मेडिकल की फील्ड में नाम कमाया तो डॉ. शंकर दयाल शर्मा देश के राष्ट्रपति बने।
90 वर्षीय डॉ. गिरी लाल ने 2007 में विवि में दो इंस्टीट्यूट डॉ. शंकर दयाल शर्मा इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी और डॉ. गिरी लाल गुप्ता इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ खोले।
इनमें डिप्लोमा इन डेमोक्रेसी एंड गर्वेंस और मॉस्टर पब्लिक हेल्थ (एमपीएच), डिप्लोमा हेल्थ एंड हाईजीन और डिप्लोमा इन वेलनेस टूरिज्म शुरू किया गया।
साथ ही उन्होंने महमूदाबाद हॉस्टल के दोनों कमरों का सौंदर्यीकरण करवाया। इंस्टीट्यूट्स के लिए डॉ. गिरी लाल ने 4.60 करोड़ रुपये खर्च किए लेकिन 2007 के बाद से ही इनमें स्टूडेंट्स की संख्या लगातार कम होती चली गई।
अब केवल एक कोर्स मॉस्टर पब्लिक हेल्थ चल रहा है। स्टूडेंट्स की संख्या पूरी न होने के कारण शेष एक सत्र के बाद से बंद कर दिए गए।
डॉ. गुप्ता ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और साथ ही अन्य संस्थाओं से एमओयू करवाकर कोर्स शुरू कराने के लिए जान फूंकने की कोशिश की लेकिन नतीजा नहीं निकला।