भातखण्डे संगीत सम विश्वविद्यालय का तीसरा दीक्षांत समारोह शनिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में होगा।
इस मौके पर पद्मविभूषण पं. हरिप्रसाद चौरसिया बांसुरी की कर्णप्रिय प्रस्तुतियों से शाम को यादगार बनाएंगे। साथ ही विश्वविद्यालय में अव्वल रहे प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को स्वर्ण, रजत व कांस्य पदक से सम्मानित किया जाएगा।
दीक्षांत समारोह के दूसरे दिन विश्वविद्यालय के मुक्ताकाशी मंच पर कॉलेज के छात्र-छात्राएं प्रस्तुतियां देंगे।
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना व महाकवि कालिदास की रचनाओं पर आधारित नृत्य प्रस्तुति ऋतु मंडनम से होगी। इसके अलावा एमपीए व बीपीए में पहले, दूसरे व तीसरे स्थान पर आने वाले छात्र-छात्राओं को मेडल दिए जाएंगे।
एमपीए के छात्र आसबर्ट विश्वास लायल को सर्वाधिक मेडल मिलेंगे। उन्हें राय उमानाथ बली स्वर्ण पदक, पुतलीबाई स्मृति स्वर्ण पदक और पं. सखाराम मृदंगाचार्य स्वर्ण पदक दिया जाएगा।
इसके अलावा पं. वीएस निगम स्वर्ण पदक स्वाति मेहरोत्रा, पं. मोहन राव कल्याणपुरकर स्वर्ण पदक रश्मि शुक्ल, पं. सदाशिव राव स्वर्ण पदक वेंकटेश ढकाल सहित कई श्रेणियों में पुरस्कार बांटे जाएंगे।
सात को पीएचडी की डिग्री
दीक्षांत समारोह में सोनम गुप्त, शशिप्रभा जायसवाल, विश्वप्रभा त्रिपाठी, दिव्या श्रीवास्तव, एकता पंडित, कमलेश दुबे और रुचि खरे को पीएचडी उपाधियां दी जाएंगी।
इन्हें भी मिलेंगे मेडल
एमपीए में अपर्णा द्विवेदी, अन्नू जायसवाल, डब्लू ए एम विसिडिगामा, खुशबू, विकास अवस्थी, आनन्द दीक्षित, अमीषा तिवारी, बीनू शर्मा व बीपीए में अरुणा देवी, एसएच वहालथेंथर, सृष्टि शर्मा, आर इशानायका, अमिताभ शर्मा व एसपी समीरा सम्पथ को मेडल मिलेंगे।
तीसरे दीक्षांत में लगेगा मेडलों का अर्द्धशतक
भातखण्डे के तीसरे दीक्षांत समारोह में छात्रों को दिए जाने वाले मेडलों की फिफ्टी पूरी होगी। तीसरे दीक्षांत समारोह में छात्रों को 21 पदकों के साथ 7 को पीचडी की डिग्री बांटी जानी है।
तीनों समारोह में बांटे जाने वाले पदकों की संख्या का आंकड़ा 58 तक पहुंचेगा। इससे पहले 10 फरवरी 2012 को कैसरबाग बारादरी में हुए भातखंडे संस्थान के पहले दीक्षांत समारोह में 17 छात्रों को पदक बांटे जाने के साथ ही 18 को पीएचडी की उपाधि भी दी गई थी।
जबकि 6 मार्च 2013 को गोमतीनगर के एसएनए में हुए दूसरे दीक्षांत समारोह में 14 छात्रों को 20 विभिन्न पदकों से नवाजा गया था।
साथ ही अपनी पीएचडी पूरी कर चुके 4 शोधार्थियों को डिग्रियां भी दी गई थी। पहले दीक्षांत समारोह में पं. जसराज और दूसरे में पं. बिरजू महाराज मुख्य अतिथि रहे थे।