एससीए चुनाव और फीस बढ़ोतरी जैसे मुद्दे पर एक साथ आंदोलन का दम भरने छात्र संगठनों का बंटाधार हो गया है। बुधवार को तीनों संगठनों ने खुले मंच से छात्र हित में विचारधारा को अलग रखकर आम सहमति बनाकर आंदोलन लड़ने की बात कही थी।
वीरवार को माजरा कुछ और ही थी। एबीवीपी ने अपने स्तर पर आंदोलन का आगाज करने का ऐलान किया है।
वहीं एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय और संजौली कॉलेज में इन दोनों मुद्दों के खिलाफ अकेले ही प्रदर्शन किया। एसएफआई ने शहर के कॉलेजों में प्रदर्शन नहीं किया, मगर प्रदेश के कॉलेजों में शिक्षा का बहिष्कार और प्रदर्शन किया।
एनएसयूआई और एबीवीपी ऐसे किसी मोर्चे के गठन पर राजी होने को फिलहाल तैयार नहीं है, मगर एसएफआई ने अभी विकल्प खुले रखे हैं।
एबीवीपी के प्रदेश सह मंत्री नवनीत कौशल ने कहा कि एबीवीपी किसी मोर्च में शामिल न होकर अकेले आंदोलन लड़ेगी। संगठन का प्रदेश में जनाधार है।
संगठन के आंदोलन की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। इसका आगाज शुक्रवार से विवि और कॉलेजों में
रैली से किया जा रहा है।
एसएफआई के प्रदेश सचिव मुनीश शर्मा का कहना है कि एसएफआई ने दोनों संगठनों से इन दो फैसलों के खिलाफ एकजुट हो आंदोलन करने का प्रस्ताव दिया था। संगठनों से बात चल रही है। यदि सहमति नहीं भी बनी तो एसएफआई अपने दम पर आंदोलन करेगी।
एनएसयूआई के प्रदेश महासचिव अरविंद धीमान का कहना है कि एनएसयूआई अपने स्तर पर ही इन दोनों फैसलों के खिलाफ आंदोलन लड़ेगी। कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर इसकी शुरूआत कर दी गई है। प्रदेश कार्यकारिणी जल्द आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी।