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प्रशासन की लापरवाही, बेवजह भटके परीक्षार्थी

Mon, 26 Aug 2013 12:51 AM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
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अदालत के आदेश के बाद भी प्रशिक्षित स्नातक व प्रवक्ता पदों की लिखित परीक्षा निरस्त होने की समय से सूचना जारी न किए जाने से परीक्षार्थियों को काफी दिक्कत उठानी पड़ी।
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राजधानी पहुंचे नाराज अभ्यर्थियों ने परीक्षा केंद्रों पर खूब हंगामा किया। परीक्षार्थियों की मानें तो हाईकोर्ट ने 19 अगस्त को इस परीक्षा पर रोक लगा दी थी।

इसके बाद भी उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से परीक्षार्थियों को इस संबंध में समय रहते कोई सूचना नहीं दी गई, जिसके चलते असमंजस की स्थिति को पैदा हो गई।
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उधर, जानकारों का कहना है कि परीक्षा निरस्त होने के संबंध में आयोजकों की ओर से 23 अगस्त यानी सिर्फ दो दिन पहले ही आदेश जारी किए गए। इसे समय रहते सार्वजनिक न किए जाने के कारण परीक्षार्थियों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ी।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से प्रशिक्षित स्नातक तथा प्रवक्ता पदों पर भर्ती के लिए रविवार को परीक्षा निर्धारित की गई थी। परीक्षा के लिए राजधानी में 30 केंद्र भी निर्धारित किए गए।

करीब 15 हजार अभ्यर्थियों का शामिल होना प्रस्तावित था, लेकिन दीप्ती मिश्रा व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश शासन के एक मामले में उच्च न्यायालय ने 19 अगस्त को चयन बोर्ड द्वारा निर्धारित इस परीक्षा पर रोक लगा दी।

परीक्षार्थियों की मानें तो, करीब एक सप्ताह पहले न्यायालय का आदेश आने के बाद भी शिक्षा चयन बोर्ड की ओर से इस संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई।

असमंजस की स्थिति के चलते हजारों की संख्या में रविवार को परीक्षार्थी राजधानी के केंद्रों पर परीक्षा देने पहुंच गए। यहां उन्हें परीक्षा निरस्त होने के संबंध में जानकारी दी गई। इस पर अभ्यर्थी भड़क उठे।

भड़के अभ्यर्थियों ने बाल विद्या निकेतन बालाकदर रोड, एमकेडी इंटर कॉलेज पेपर मील कालोनी समेत कई अन्य केंद्रों पर जमकर हंगामा काटा।

परीक्षार्थियों का आरोप है कि आयोजकों ने समय रहते इस संबंध में सूचना नहीं दी। जिसके चलते सुल्तानपुर, रायबरेली, बहराइच समेत कई दूर दराज के इलाकों के परीक्षार्थियों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।

23 अगस्त को जारी किया था आदेश
परीक्षा को लेकर उत्पन्न हुई इस स्थिति के लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। हाईकोर्ट ने 19 अगस्त को इस परीक्षा पर रोक लगा दी थी। इतना ही नहीं चयन बोर्ड की आगामी एक सितंबर और आठ सितंबर को प्रस्तावित परीक्षाओं पर भी रोक लगा दी।

आयोजकों को इस निर्णय के तुरंत बाद परीक्षा निरस्त किए जाने के संबंध में सूचना को सार्वजनिक करना चाहिए था, लेकिन इसे चोरी-छिपे 23 अगस्त को दोपहर बाद जारी किया गया। इसी का नतीजा है कि माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों तक को इसके बारे में कोई सूचना नहीं थी।
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