रविवार को सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गनाइजेशन की ओर से इस प्रतिभाशाली छात्रा को ‘सुलभ प्रेरणादायी’ पुरस्कार के तहत पांच लाख रुपये के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
सुलभ स्वच्छता एवं समाज सुधार आंदोलन के संस्थापक डॉ. बिंदेश्वरी पाठक सुषमा को सम्मानित किया। सुषमा को पढ़ाई में किसी तरह की दिक्कत नहीं हो, इसलिए उसे आई फोन, आई पैड, डेस्कटॉप, एलसीडी टीवी, कैमरा और प्रिंटर दिया गया।
उल्लेखनीय है कि साढ़े तेरह वर्षीय सुषमा वर्मा ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय में एमएससी माइक्रोबायोलॉजी में दाखिला लिया है।
बिंदेश्वरी पाठक ने यह भी कहा कि सुषमा के परिवार के हर साल सुलभ इंटरनेशनल की ओर से 6 लाख रुपये दिए जाएंगे। कार्यक्रम में ही परिवार को अगले छह महीने के हिसाब से तीन लाख का चेक दे भी दिया गया।
सुषमा के साथ ही बाल प्रतिभा के धनी आईआईटी मुंबई के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तथागत तुलसी को भीद स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। तथागत ने कहा कि उन्हें सुषमा की तरक्की पर बेहद खुशी है। उन्होंने कहा कि जब सुषमा ने मेरा रिकॉर्ड तोड़ा तो मुझे बहुत खुशी हुई।
डॉ. तथागत तुलसी ने 11 वर्ष की उम्र में इंटरमीडिएट पास किया और बहुत कम उम्र में ही पीएचडी कर आईआईटी में नौकरी हासिल की। इधर, बीबीएयू ने सुषमा की ट्यूशन फीस माफ कर दी है और उसे अब सिर्फ 1150 रुपये ही फीस जमा करनी पड़ी है।
सुषमा का सफर
सात फरवरी 2000 में जन्मी सुषमा वर्मा ने 2010 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उसने सीएमएस गर्ल्स डिग्री कॉलेज से बीएससी 66 प्रतिशत अंकों के साथ पास किया है।
सुषमा को सबसे पहले बीबीएयू की एकेडमिक काउंसिल ने विशेष प्रावधान के तहत एमएससी में दाखिले की हरी झंडी दी थी मगर जब उसे एडमिशन मिलने में थोड़ा समय लगा तो उसने लखनऊ विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए आवेदन कर दिया और वहां पर उसने एमएससी माइक्रोबायोलॉजी की 25 हजार रुपये फीस भी जमा कर दी।
इसके बाद उसके पिता तेज बहादुर वर्मा ने आर्थिक मदद की गुहार लगाई थी। बाद में सुषमा ने बीबीएयू में दाखिला ले लिया।
सुषमा को आर्थिक मदद देने के लिए मशहूर गीतकार जावेद अख्तर, मुंबई के कोल्हापुर में शिक्षक व समाजसेवी अभिषेक पाटिल, एनआरआई और माइक्रोसॉफ्ट कंपनी में अधिकारी रफत सरोश ने आर्थिक मदद का ऐलान किया है।