सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक फैसले में दिल्ली में चल रही नर्सरी एडमिशन प्रक्रिया पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट प्राइवेट स्कूलों की एक दूसरी याचिका पर 31 जनवरी को सुनवाई करने के लिए राजी हो गया है।
उप राज्यपाल नजीब जंग ने जारी किए थे निर्देश
प्राइवेट स्कूलों की याचिका पर फैसला देते हुए देश के सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि वह दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग के गाइडलांइस पर रोक नहीं लगाएगी। जंग ने अपने गाइडलाइन में 20 प्रतिशत मैनजमेंट कोटा को हटाने की बात कही है।
दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग ने 18 और 27 दिसंबर को जारी किए अपने गाइडलाइन में प्राइवेट स्कूलों को कई दिशा निर्देश जारी किए थे।
प्राइवेट स्कूलों की ही याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 जनवरी को कहा था कि दिल्ली सरकार, उप राज्यपाल के गाइडलाइंस के मुताबिक नोटिफिकेशन और एडमिशन की तारीख जारी करे।
हाईकोर्ट में क्या हुआ था
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रामन और न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलो की खंडपीठ ने स्कूल एसोसिएशन की याचिका खारिज करते हुए कहा कि उपराज्यपाल ने ऐसे समय में अधिसूचना जारी की, जब सरकार का गठन होने में देरी हो रही थी।
उन्होंने कहा था कि अगर अधिसूचना पर रोक लगाई जाती है तो यह बच्चों और अभिभावकों के हित में नहीं होगा।
खंडपीठ ने कहा कि स्कूल एसोसिएशन उन्हें संतुष्ट नहीं कर पाए कि अगर उनको अंतरिम राहत नहीं मिली तो क्या नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि उनकी नजर में सिंगल जज द्वारा 10 जनवरी को दिया गया फैसला सही है और खंडपीठ उससे सहमत है।
स्कूलों ने नए दिशा-निर्देशों के तहत स्कूलों के पड़ोस में रहने वाले बच्चों को प्राथमिकता देने और 20 प्रतिशत प्रबंधन कोटा को खत्म करने के फैसले को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि उपराज्यपाल को ऐसा आदेश देने का अधिकार नहीं है।
खंडपीठ ने कहा कि उपराज्यपाल ने दिल्ली स्कूल एजुकेशन एक्ट 1973 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह अधिसूचना जारी की है। उन्होंने स्कूलों के उस तर्क को खारिज कर दिया कि मैनेजमेंट कोटे को सर्वोच्च न्यायालय में भी उचित ठहराया है। अदालत ने कहा कि मैनेजमेंट कोटा उचित है, लेकिन इसकी आड़ में डोनेशन या केपिटेशन फीस नहीं ली जा सकती।
अदालत ने कहा कि दाखिला प्रक्रिया 15 जनवरी से शुरू होनी थी, लेकिन स्कूलों की याचिका के कारण इसमें देरी हो चुकी है। आगामी शैक्षणिक सत्र को शुरू किया जाना जरूरी है। अदालत ने कहा कि जहां तक गैर सहायता प्राप्त स्कूलों की स्वायत्तता और उन पर सरकारी दिशा-निर्देशों की प्रासंगिकता का सवाल है, इस मुद्दे पर सिंगल जज ही सुनवाई करेंगे और उन्होंने तारीख तय कर रखी है।
सिंगल जज ने कहा था
सिंगल जज ने 10 जनवरी के फैसले में कहा था कि वर्तमान में दाखिलों संबंधी जारी अधिसूचना पर रोक लगाने का आधार नहीं है। स्कूल इस साल नए दिशा-निर्देशों के तहत ही दाखिला दें। अगर कोई परेशानी आई तो उस पर अगले साल विचार किया जाएगा। अदालत ने कहा था कि यह काफी गंभीर मुद्दा है और इस पर इस पर जल्दबाजी में निर्णय नहीं दिया जा सकता। अदालत ने सुनवाई 11 मार्च तय की थी।
स्कूलों का तर्क था
गैर सहायता प्राप्त स्कूलों की एक्शन कमेटी ने याचिका में उपराज्यपाल डॉ. नजीब जंग द्वारा 18 दिसंबर को अधिसूचना जारी करने के अधिकार क्षेत्र को चुनौती देते हुए इसे गैरकानूनी और मनमाना बताया था। याचिका में स्कूलों ने नर्सरी और प्री-प्राइमरी दाखिला नीति को रद्द करने का आग्रह करते हुए स्वायत्तता का हवाला भी दिया था। उनका कहना था कि सरकार को 75 प्रतिशत सामान्य सीटों पर दाखिले में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
हेल्पलाइन पर 1351 कॉल्स, शिकायतों का आंकड़ा 159
इन सबके बावजूद नर्सरी एडमिशन के लिए जारी हेल्पलाइन नंबर पर लगातार कॉल्स आ रहे हैं।
न केवल कॉल्स की संख्या बढ़ती जा रही है बल्कि शिकायतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। शिक्षा निदेशक पद्मिनी सिंघला ने बताया कि हेल्पलाइन पर बृहस्पतिवार को 1351 कॉर्ल्स आइं।
जिसमें शिकायतों का आंकड़ा 159 पहुंच गया है। शिकायतों के संबंध में उन्होंने कहा कि प्रोसपेक्टस की अधिक कीमतों, आयु, पता प्रमाण पत्र, डोनेशन से संबंधित शिकायतें ज्यादा आ रही हैं। इस बारे में उपशिक्षा निदेशकों से जानकारी ली जा रही है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर निदेशायल स्कूल के खिलाफ कार्रवाई भी करेगा।