पिछली बार वर्ष 2000 में भारतेंदु नाट्य अकादमी का दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ था। लेकिन इसके इन 13 वर्षों में एक बार भी समारोह का आयोजन नहीं हो सका है।
जिससे दो सौ से अधिक ऐसे छात्रों का सम्मान अधर में लटका हुआ है, जो फिल्म व धारावाहिकों में अपने अभिनय के जरिए अकादमी का नाम रोशन कर रहे हैं। अधिकारी समारोह न होने का कारण बजट की कमी बताते हैं।
अकादमी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि 1975 से लेकर वर्ष 2013 के बीच सिर्फ एक बार ही दीक्षांत समारोह आयोजित कराया गया है। वह भी वर्ष 2000 में। लेकिन पिछले 13 वर्षों से प्रतिवर्ष दीक्षांत समारोह के लिए खर्च का बजट संस्कृति विभाग को भेजा जा रहा है।
जहां से संस्तुति के लिए इसे वित्त विभाग को भेज दिया जाता है। लेकिन जब वित्त विभाग बजट में प्रस्तावित खर्चों पर बातचीत के लिए संस्कृति विभाग के आला अधिकारियों को आमंत्रित करता है तो कोई भी अधिकारी चर्चा के लिए नहीं जाता।
विभागीय अधिकारियों को अकादमी की समस्याओं और जरूरतों की अच्छी जानकारी होती नहीं और अकादमी के जिन अधिकारियों को इसकी अच्छी जानकारी है उन्हें चर्चा के लिए वित्त विभाग के पास भेजा नहीं जाता। जिससे वित्त विभाग पुराने बजट केआधार पर नए बजट में मामूली हेरफेर कर संस्तुति कर देता है।