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खातों में कैद होकर रह गया छात्राओं का 'भविष्य'

Fri, 04 Oct 2013 12:05 AM IST
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून
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दून के एमकेपी कॉलेज में प्रबंधन समिति की करनी छात्राओं को भुगतनी पड़ रही है। भ्रष्टाचार के आरोपों में समिति भंग और खाते सीज होने के कारण कॉलेज में इस साल सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों के दाखिले नहीं हो पाए हैं।
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गढ़वाल विवि के पीजी सेमेस्टर की सेशनल परीक्षाएं शुरू होने को हैं, ऐसे में जल्द फैसला न हुआ तो इन पाठ्यक्रमों में दाखिले का इंतजार कर रही छात्राओं का एक साल बर्बाद हो जाएगा।

सेल्फ फाइनेंस मोड में संचालित होते हैं कोर्स
एमकेपी में ‘एमए ड्राइंड एंड पेंटिंग’ और ‘एमए होमसाइंस’ कोर्स सेल्फ फाइनेंस मोड में संचालित होते हैं। इन पाठ्यक्रमों की 20-20 सीटों पर मेरिट के आधार पर दाखिले दिए जाते हैं। इस साल भी काफी छात्राएं इन पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए कॉलेज के चक्कर काट रही हैं।
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दरअसल इन कोर्सों में एडमिशन के लिए बैंक ड्राफ्ट कॉलेज प्रबंधन समिति के नाम से बनता है। यह समिति भंग हो चुकी है, लेकिन ड्राफ्ट का नियम नहीं बदला गया। सीज हो चुके खातों से लेनदेन प्रतिबंधित होने के कारण इन कोर्सों में दाखिले भी लटक गए हैं।

फिलहाल जिलाधिकारी इस कॉलेज में प्रशासक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। छात्राओं का कहना है कि डीएम चाहें तो यह समस्य तत्काल सुलझ सकती है। कॉलेज प्राचार्य ने भी डीएम से इस संबंध में बातचीत की है।

नियम पर सवाल
डीएवी, डीबीएस और एसजीआरआर कॉलेज में सेल्फ फाइनेंस कोर्स में फीस का ड्राफ्ट प्राचार्य के नाम से बनता है। ऐसे में एमकेपी में अलग नियम पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरे कॉलेजों में प्राचार्य प्रबंधन समिति का ही एक हिस्सा होता है। कॉलेज की सभी ग्रांट और एडमिशन शुल्क प्राचार्य के नाम से ही आता है। जो कि अलग-अलग मदों के खाते में ट्रांसफर हो जाता है।

एमकेपी पहुंची शासन की जांच टीम
भ्रष्टाचार के आरोपों में प्रबंधन समिति को भंग करने के बाद शासन की जांच टीम बृहस्पतिवार को एमकेपी कॉलेज पहुंची। टीम में शामिल ऑडिटर कॉलेज के सभी खातों की जांच के बाद शासन को रिपोर्ट सौंपेंगे। टीम ने कॉलेज के खातों से संबंधित दस्तावेज अपने हाथ में ले लिए हैं। टीम न यूजीसी से मिली 45 लाख रुपये ग्रांट और अन्य खातों से हुए लेन-देन की जांच करेगी। पहले दिन टीम ने जिलाधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम से मुलाकात कर आवश्यक जानकारियां एकत्र की।
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