दो साल तक छात्र किताबों का घोंटा लगाकर अपने स्वर्णिम भविष्य को ताकते रहे कि अचानक सब चौपट हो गया और बिना एग्जाम ही इन छात्रों को परिणाम मिल गया। अब हाथ में डिग्री के बजाय मायूसी लिए छात्र खामोश हैं।
नैनीताल हाईकोर्ट की ओर से देहरादून के डीएवी कालेज पर लॉ में दाखिला नियमावली का पालन न करने पर जुर्माना किया गया, लेकिन जिन छात्रों के दाखिले निरस्त हुए, वह कालेज प्रशासन और गढ़वाल विवि की लापरवाही से निराश हैं।
पास होने के बावजूद दोबारा दे रहे परीक्षा
फैसले तक कर चुके पढ़ाई पूरी
डीएवी में लॉ प्रवेश परीक्षा के बाद 11 ऐसे छात्र थे, जिनके यूजी कोर्स में अंक 40 प्रतिशत थे। कानूनी कार्रवाई होने के दौरान यह छात्र लगातार परीक्षा देते रहे। जब हाईकोर्ट का फैसला आया, तब तक यह छात्र चार सेमेस्टर (दो साल) की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं।
इसके बाद स्थिति स्पष्ट हुई कि दाखिला वैध नहीं है। छात्रों को रंज इस बात का है कि केवल एक साल बाद वह वकील बन जाते लेकिन ऐसा नहीं हो सका। पूरे मामले की पड़ताल की गई तो पता चला कि इसके लिए गढ़वाल विवि भी बराबर का दोषी है।
विवि की लापरवाही
विवि की ओर से कभी इस मामले पर ध्यान नहीं दिया गया कि किस योग्यता के आधार पर छात्रों के दाखिले दिए जा रहे हैं। नतीजतन डीएवी कालेज पुरानी नियमावली के तहत ही दाखिले लेता रहा।
जब विवि नींद से जागा तो इन छात्रों के दाखिले रिजेक्ट हुए। कालेज प्राचार्य डा. देवेंद्र भसीन ने बताया कि यह मामला उनके कार्यकाल से पहले का है। अभी तक कोर्ट की ओर से उनके पास कोई सूचना नहीं आ पाई है।