तमाम सरकारी अभियानों के बाद भी उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों की ओर बच्चों के कदम नहीं बढ़ पा रहे हैं। साल-दर-साल छात्रों की संख्या घटने से स्कूलों को बंद करने की नौबत बनी हुई है।
रुद्रप्रयाग जिले में पिछले सत्र की तुला में 900 छात्र कम हुए हैं। चमोली जनपद में 123 बेसिक स्कूलों में छात्र संख्या दस से कम है। चमोली जिले में भी दो वर्षों में आठ, टिहरी जिले में 61 बेसिक स्कूल बंद हो चुके हैं। पौड़ी में 169 स्कूलों में छात्र संख्या पांच से कम रह गई है।
रुद्रप्रयाग में सरकारी स्कूलों में 900 छात्र घटे
रुद्रप्रयाग जनपद में कम छात्र संख्या में हो रही कमी से अगले सत्र में 68 बेसिक स्कूल बंद हो सकते हैं। इनमें छात्र संख्या 10 से कम है। कई विद्यालयों में तो कक्षा एक व दो में छात्र ही नहीं है। प्राथमिक स्तर पर बीते सत्र की तुलना में इस सत्र में जिले में 900 छात्र कम पंजीकृत हुए हैं।
बेसिक शिक्षा को हाईटेक करने और छात्र संख्या को बढ़ाने की कोशिशें परवान नहीं चढ़ पा रही हैं। जिले के 558 प्राथमिक विद्यालयों में कुरछोला स्कूल में ही छात्र संख्या 101 है। ल्वारा में 81 छात्र-छात्राएं हैं। जिले के 32 प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या 50 या उससे अधिक है।
20 से 50 छात्र संख्या वाले विद्यालयों की संख्या भी तीस फीसदी ही है। सत्र 2012-13 में प्राथमिक स्कूलों में 16503 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे, जो सत्र 2013-14 में घटकर 15360 रह गई है। जबकि इस सत्र में आंकड़ा 14460 तक पहुंच गया है।
30 स्कूलों में कक्षा 1 की क्लास नहीं
अगस्त्यमुनि में 16 प्राथमिक में कक्षा एक और इतने ही विद्यालयों में कक्षा दो में एक भी प्रवेश नहीं है। जखोली और ऊखीमठ में 7-7 विद्यालयों में कक्षा एक में छात्र संख्या शून्य है।
ये विद्यालय हो चुके बंद
कम छात्र संख्या के कारण जिले में छह वर्षों में राजकीय जूनियर हाईस्कूल भटवाड़ी सैंण, कांडा-सिमतोली, प्राथमिक विद्यालय गिंवाड़ी, पाली नवीन, पोला, चौंड, थारतोली, सिमतोली, कांडा, खिमसारी, बंडरी, भष्टी, गौरीकुंड, देवशालय, त्यूंग, छैली, धारवाली और तेजण बंद हो चुके हैं।
यहां बढ़े छात्र-छात्राएं
रुद्रप्रयाग के जखोली ब्लाक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय मातगांव भरदार में बीते सत्र में 49 बच्चे थे, जो इस बार 76 हो गए हैं। तलवाड़ा गोर्ती में बीते सत्र में जहां 11 बच्चे थे, वहां इस सत्र में 38 हो गए हैं। जखोली के उप शिक्षाधिकारी डा. सुरेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि इन स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ने का कारण शिक्षक जितेंद्र सिंह व अवतार सिंह के निजी प्रयास रहे हैं।
जनपद में 10 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को बंद करने के लिए उच्च स्तर से मौखिक निर्देश तो मिले हैं, लेकिन लिखित आदेश के बाद ही नए शिक्षण सत्र से इन्हें बंद करने की कार्रवाई की जाएगी। इस सत्र में प्राथमिक स्तर पर जनपद में नौ सौ से अधिक छात्र कम हुए हैं।
- सुभाष चंद्र भट्ट, सीईओ रुद्रप्रयाग
दो वर्षों में आठ स्कूल हुए बंद
चमोली जनपद में 123 प्राथमिक विद्यालयों में छात्र संख्या दस से कम है। ऐसे में ये विद्यालय बंद होने के कगार पर हैं। दो वर्षों में आठ प्राथमिक विद्यालय पहले ही बंद हो गए हैं। वहां यहां पढ़ने वाले छात्रों को नजदीकी स्कूलों में शिफ्ट किया गया है।
चमोली जनपद में 976 प्राथमिक विद्यालयों में 50 हजार 85 छात्र-छात्राएं हैं। अधिकांश प्राथमिक विद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। ग्रामीण निजी विद्यालयों के बजाय अपने पाल्यों को प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाते हैं।
स्कूल चलो अभियान से बढ़े 70 छात्र
चमोली जनपद में 1 जुलाई 2015 को स्कूल चलो अभियान के तहत 32 स्कूलों में छात्र संख्या में इजाफा हुआ। हालांकि छात्रों की बढ़ी संख्या 70 ही है। मुख्य शिक्षा अधिकारी हरीश चंद्र सिंह रावत का कहना है कि छात्र संख्या बढ़ाने और गुणात्मक शिक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। जिले में कहीं भी अब स्कूल बंद होने की नौबत नहीं है। लगातार छात्र संख्या बढ़ रही है।
टिहरी में भी नहीं बढ़ पा रही छात्र संख्या
टिहरी जिले में तमाम कोशिशों के बावजूद सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ने का नाम नहीं ले रही है। छात्र संख्या घटने से दो वर्षों में 61 स्कूल बंद हुए हैं। जिले में 1476 प्राथमिक विद्यालयों में 36,229 छात्र-छात्राएं हैं। 247 स्कूलों में छात्र संख्या 10 से कम है।
आगामी सत्र में छात्र संख्या नहीं बढ़ने पर 150 विद्यालयों के बंद होने की नौबत आ सकती है। सत्र 2014-15 में बेसिक स्कूलों में 39, 639 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत थे। जबकि इस सत्र में छात्रों की संख्या तीन हजार 410 कम हुई है। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक अशोक कुमार गुसाईं का कहना है कि जिले के सभी 1476 विद्यालयों में शिक्षक हैं।
पौड़ी में 169 स्कूलों में पांच से कम छात्र
पौड़ी जिले में 1700 प्राइमरी स्कूलों में से 101 स्कूल छात्र संख्या शून्य होने के कारण बंद हो चुके हैं। इनमें 33 स्कूल पिछले साल ही बंद हुए हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार वर्तमान में जिले में संचालित 1599 प्राइमरी स्कूलों में से 510 स्कूलों में दस से कम और 169 स्कूलों में पांच से कम विद्यार्थी रह गए हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक कुंवर सिंह रावत कहते हैं ग्रामीण क्षेत्रों से हो रहे पलायन और सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों का घटना रुझान इसका मुख्य कारण है। प्राइमरी स्कूलों के प्रति विद्यार्थियों का रुझान बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।