देहरादून के डीएवी पीजी कॉलेज के छात्र संघ चुनाव में किसी और के इशारे पर सबकुछ तय किया जा रहा है।
पढ़ें, अब नए विवाद से घिरा डीएवी
इनके (थिंक टैंक) आदेशानुसार ही चुनाव जीतने को एरिया बांटे गए और हर एरिया का एक बॉस निर्धारित किया गया है, जिसका जिम्मा यह है कि वह वोटर टाइप, एरिया देखकर कन्वेसिंग प्लान करे।
पार्टी के थिंक टैंक द्वारा की गई प्लानिंग के मुताबिक प्रत्याशी को तो बस सुबह-सवेरे एक प्लान पकड़ा दिया जाता है, जिसके मुताबिक उसका मूवमेंट तय होता है। मुद्दों के आधार पर छात्र संघ चुनाव लड़ने का दावा कर रही स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सचिव पंकज के अनुसार संगठन प्रत्याशियों को जिताने के लिए शहर में 24 कमेटी बनाई गई हैं।
पढ़ें, वाट्स एप से निकला 'जिन्न'
इनके तहत तकरीबन डेढ़ हजार सदस्य काम कर रहे हैं। इनकी कैंपेनिंग के बॉस अनुभवी, परिपक्व लेखराज हैं। उनकी सलाह पर मैनेजमेंट का खास ध्यान रखा जाता है। एसजीआरआर पीजी कॉलेज में चुनाव संचालित करने की जिम्मेदारी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के आशुतोष के जिम्मे है।
इनके 8 सदस्यीय 8 दलों के साथ हर क्षेत्र के लिए रणनीति तय है। रविवार को अवकाश होने के चलते सारा जोर डोर-टू-डोर कन्वेसिंग पर रहा। प्रेमनगर, बिहारीगढ़ जैसे क्षेत्र उन्होंने कवर किए।
आउट सोर्सिंग भी
आउट सोर्सिंग महज बीपीओ सेक्टर में ही नहीं होती। छात्र संघ चुनाव में भी कन्वेसिंग के लिए आउट सोर्सिंग का सहारा लिया जा रहा है। तमाम बाहरी कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों के छात्र डीएवी कॉलेज के प्रतिष्ठित चुनाव में कन्वेसिंग का जिम्मा उठाए हुए हैं। इसके लिए निश्चित भुगतान भी पा रहे हैं।
पढ़ें, ये है दबंगई और मनमानी की हद
छात्र संघ चुनाव जीतने के लिए मतदाताओं को लुभाने का कोई तरीका प्रत्याशी नहीं छोड़ रहे। भाषा भी इसमें बड़ा माध्यम बना हुआ है। कई प्रत्याशी गढ़वाली में मतदाताओं को रिझाते नजर आए।
भैजी मी कुई बोट द्याण...जैसी गुजारिश घरों में गूंजती रही। पुराने छात्र नेता नयों को साथ लेकर कन्वेसिंग कराते घूमते रहे।
फेसबुक पर अपनी राय देने के लिए यहां क्लिक करें