कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की ओर से देहरादून में रविवार को जीडी भर्ती परीक्षा कराई गई। परीक्षा में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़ आदि शहरों से 9598 अभ्यर्थी शामिल हुए। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच परीक्षा कराई गई।
एडीएम वित्त प्रताप शाह ने बताया कि एसएससी परीक्षा के लिए दून में 24 केंद्र बनाए गए थे। पहली पाली में 10073 में से 9814 अभ्यर्थी शामिल हुए, 259 अनुपस्थित रहे। दूसरी पाली शुरू होने से पहले ही इन 9814 अभ्यर्थियों में से 216 अभ्यर्थी परीक्षा छोड़कर चले गए। दूसरी पाली में 10073 में से 9598 अभ्यर्थी उपस्थित हुए जबकि 475 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।
परीक्षा के लिए उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, बनारस, शामली सहित कई जिलों के अलावा पूरे उत्तराखंड, हरियाणा, चंडीगढ़ से भी अभ्यर्थी दून पहुंचे। परीक्षा के बीच में पेपर लीक होने की भी अफवाह फैली लेकिन बाद में यह झूठी निकली। एडीएम प्रताप शाह ने बताया कि परीक्षा शांतिपूर्ण रही।
एसएससी जीडी की परीक्षा में उमड़े परीक्षार्थी
एसएससी जीडी की लिखित परीक्षा देने के लिए बेरोजगारों का रेला दून में उमड़ा तो शहर जाम हो गया। चौबीस घंटों तक शहर पर परीक्षार्थियों का कब्जा रहा। बस अड्डों, रेलवे स्टेशन, होटलों में हर जगह बेरोजगारों की भीड़ दिखाई दी।
रविवार को शहर के दर्जनों कॉलेजों में देशभर से आए हजारों परीक्षार्थियों ने एसएससी जीडी की परीक्षा में भाग लिया। परीक्षा के लिए शनिवार देर सायं से ही परीक्षार्थी आने शुरू हो गए। रेलवे और रोडवेज प्रशासन को उनको लाने में कड़ी मशक्कत उठानी पड़ी।
उसके बाद शुरू हुई परीक्षार्थियों की मशक्कत, रात गुजारने को परीक्षार्थी जिस होटल, धर्मशाला का रुख करते, वहां कमरे फुल। सड़क, फुटपाथ, रेलवे स्टेशन जहां भी जगह मिली परीक्षार्थियों ने वहीं रात गुजारी। दिन निकलने पर परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों में मची आपाधापी से शहर की सड़कें जाम हो गई। कई-कई किलोमीटर के जाम से शहरवासी हलकान हो गए। परीक्षा छूटने पर तो इससे भी बुरा हाल हुआ। ये मुसीबत सुबह और शाम दोनों पालियों में उठानी पड़ी।
बसों की छतों पर बैठे
एसएससी की परीक्षा के मद्देनजर परिवहन विभाग ने पुख्ता तैयारी की और उस पर अमल भी किया। दिल्ली, हरिद्वार, हिमाचल आदि रूटों पर 20 से 25 बसें अतिरिक्त लगाई गई। व्यवस्था दुरुस्त होने के बाद भी बसें परीक्षार्थियों की संख्या को नही झेल पाई। बेरोजगारों की भीड़ को जान हथेली पर रखकर बसों की छतों पर सफर करने को मजबूर होना पड़ा।
डग्गामारों की चांदी
बसों और ट्रेनों की छतों पर भी जगह न मिलने पर परीक्षार्थियों ने डग्गामार वाहनों का भी सहारा लिया। डग्गामार संचालकों ने उनसे मनमर्जी किराया वसूला। बसों में भीड़ के कारण हुई डग्गामारी को देखने के बाद भी पुलिस और आरटीओ ने आंखें मूंदे रखी।