राजनीति करने के आरोप पर स्टूडेंट फॉर सोसाइटी (एसएफएस) ने कड़ा फैसला लिया। एसएफएस ने खुद को छात्र संघ चुनाव से अलग करने की घोषणा कर दी।
एसएफएस के प्रेसिडेंट अर्शदीप ने बताया कि वह छात्र संघ चुनाव नहीं लड़ेंगे। यह फैसला उन्होंने वीरवार को हॉस्टल की कुछ लड़कियों की ओर से राजनीति करने और पढ़ाई बाधित करने के आरोप के बाद लिया।
अर्शदीप ने बताया कि उनका मकसद छात्र राजनीति करना नहीं है। उनका उद्देश्य कैंपस में लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चत कराना है। कैंपस में लड़कियों को लड़कों की तरह काम की आजादी है। लेकिन रोजाना कुछ लड़कों के कमेंट्स सहने पड़ते हैं।
खुलेआम नशेड़ी तत्व गर्ल्स से छेड़छाड़ कर निकल जाते हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन पंगु बन देखता रहता है। कोई लड़की लाइमलाइट में आने से बचने और डर के मारे शिकायत नहीं देती। कोई अगर हिम्मत करती भी है तो कार्रवाई नहीं होती। एसएफएस सचिव दमन ने बताया कि वह छात्र संघ चुनाव का विरोध नहीं कर रहे। बल्कि सलेक्टिव की बजाय इलेक्टिव प्रतिनिधियों को चुनने के पक्ष में हैं।
दमन ने कहा कि चुनाव बंद होने से डेमोक्रेसी ही खत्म हो जाएगी। लेकिन लड़कियों की सुरक्षा सबसे अधिक जरूरी है। जिस कारण उन्होंने चुनाव से अलग होने का कदम उठाया है। पिछले चुनाव में एसएफएस को 1300 के लगभग वोट मिले थे।
लड़कियों ने दी थी शिकायत
हॉस्टल की लगभग 40 लड़कियों ने गर्ल्स हॉस्टल के गेट पर प्रदर्शन कर रहे एसएफएस के खिलाफ डीएसडब्ल्यू को लिखित शिकायत दी थी। लड़कियों ने शिकायत में कहा था कि प्रदर्शनकारियों के शोर से उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है। हालांकि कुछ गर्ल्स स्टूडेंट्स ने मौके पर ही शिकायत देने वाली स्टूडेंट्स को जवाब देते हुए प्रदर्शन को उन्हीं की सुरक्षा के लिए बताया था। स्टूडेंट्स का कहना था कि एसएफएस को गिराने की साजिश हो रही है।