गौतम बुद्ध प्राविधिक विश्वविद्यालय (जीबीटीयू) ने एक अनूठा प्रयोग शुरू किया है। जीबीटीयू प्रशासन ने इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) के मेधावी छात्रों को चिह्नित करना शुरू किया है।
ये छात्र अब टीचर की भूमिका में जूनियर छात्रों को पढ़ाएंगे। इन छात्रों के पहचानपत्र भी बनाए जा रहे हैं। इसका फायदा यह होगा कि जूनियर व सीनियर छात्रों के बीच संबंध अच्छे होंगे और रैगिंग की घटनाओं पर लगाम लगेगी।
यही नहीं क्लास में पढ़ाने वाले स्टूडेंट को प्रति घंटे के हिसाब से मानदेय भी दिया जाएगा। मानदेय कितना होगा इस पर अभी मंथन किया जा रहा है।
अगर यह प्रयोग सफल रहा तो आगे प्रदेश भर के सभी अन्य संस्थानों में भी इसे लागू किया जाएगा। जीबीटीयू के कुलपति डॉ. आरके खांडल के मुताबिक कोई भी सवाल न आने पर जूनियर को अपने सीनियर से पूछने पर झिझक नहीं आएगी।
कई बार क्लासरूम में टीचर्स के सामने स्टूडेंट पूरी तरह नहीं खुल पाते और सवाल पूछने में कतरा जाते हैं। लेकिन जब पढ़ाई में कमजोर इन्हीं जूनियर स्टूडेंट की क्लास सीनियर अलग से पढ़ाएंगे तो वह खुलकर अपनी समस्या बता सकेंगे।
इस प्रयोग का दूसरा फायदा यह होगा कि इसे सीनियर व जूनियर स्टूडेंट के बीच संबंध अच्छे होंगे। डॉ. खांडल कहते हैं कि जो सीनियर स्टूडेंट पढ़ाई में अच्छे हैं उनके बीच कंपटीशन भी बढ़ेगा।
क्योंकि जो सीनियर क्लास में पढ़ाएगा उसे न सिर्फ मानदेय मिलेगा बल्कि उसकी कैंपस में एक अलग पहचान भी होगी। ऐसे स्टूडेंट्स का अलग पहचान पत्र भी बनाया जा रहा है।
जब सीनियर अपने जूनियर स्टूडेंट के मार्गदर्शक बनेंगे तो अपने आप ही उनके बीच संबंध अच्छे होंगे और रैगिंग जैसी घटनाओं को रोकने में सफलता मिलेगी। फिलहाल इसे आईईटी में प्रयोग के तौर पर लागू किया जा रहा है।
हमें पूरी उम्मीद है कि यह प्रयोग सफल रहा। अगर पॉजिटिव रिस्पांस मिला तो इसे प्राइवेट कॉलेजों में भी लागू किया जाएगा।