एलयू में सेल्फ फाइनेंस कोर्स टीचिंग शॉप बनकर रह गए हैं। यूजीसी व शासन
के निर्देशों की अनदेखी कर कोर्सों को मनमाने ढंग से चलाया जा रहा है।
शिक्षकों पर खुलेआम दबाव बनाया जा रहा है कि वह पूरे साल का कोर्स 80 घंटे
और सेमेस्टर की पढ़ाई महज 40 घंटे में पूरी करवाएं। इसमें पढ़ाने वाले
शिक्षकों को सिर्फ 3 हजार या 4 हजार रुपए ही वेतन दिया जा रहा है।
वह
शिक्षकों को काफी चक्कर काटने के बाद मिलता है। यही वजह है कि एलयू में
लगातार सेल्फ फाइनेंस कोर्स बंद भी हो रहे हैं। वर्तमान शैक्षिक सत्र में
करीब दो दर्जन ऐसे कोर्स हैं जो काउंसिलिंग से पहले ही बंद हो गए।
इनमें
बहुत कम आवेदन फॉर्म आए। सेल्फ फाइनेंस कोर्स को मनमर्जी से चलाए जाने को
राजभवन ने भी गंभीरता से लिया है। अब इस मामले में एलयू प्रशासन से कोर्स
चलाने मानकों पर जवाब-तलब किया है और अनापत्ति प्रमाणपत्र भी मांगा है।
एलयू
में सेल्फ फाइनेंस कोर्स के रूप में चलाए जा रहे भूगोल, गृहविज्ञान,
ज्योर्तिविज्ञान आदि विभागों के शिक्षकों का कहना है कि एलयू में सेल्फ
फाइनेंस कोर्स चलाने के लिए तीन अलग-अलग नियम लगाए जा रहे हैं।
इसमें
प्रबंध विज्ञान संस्थान (आईएमएस) में तो शिक्षकों को 35 हजार रुपए वेतन
दिया जा रहा है और योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विभाग में भी नियमानुसार
वेतन दिया जा रहा है।
वहीं कुछ विभागों के शिक्षकों को 8 हजार से 10 हजार
रुपए महीने वेतन दिया जा रहा है। कई विभागों में मात्र 3 से 4 हजार रुपए ही
वेतन दिया जा रहा है।
भूगोल विभाग में ही यूजी, पीजी और पीएचडी में कुल
400 स्टूडेंट हैं। इनसे एलयू की सालाना कमाई 35 लाख रुपए तक हो रही है मगर
शिक्षकों को महीने का 3 से 4 हजार रुपए वेतन ही दिया जा रहा है।
क्या है नियम?
नियम है कि
सेल्फ फाइनेंस कोर्स से होने वाली आय का 60 प्रतिशत शिक्षकों के वेतन पर
खर्च किया जाए। यूजीसी का नियम है कि वार्षिक कोर्स की पढ़ाई 180 दिनों में
और सेमेस्टर की पढ़ाई 90 दिनों में पूरी होनी चाहिए।
यहां पर सेल्फ
फाइनेंस कोर्स में आधे समय में ही पूरी पढ़ाई करवाने का दबाव बनाया जाता
है। यहां पर सेल्फ फाइनेंस कोर्स के शिक्षकों को विषय विशेषज्ञ और अतिथि
अध्यापक का नाम दिया गया है।
संसाधनों की कमी है वजह
एलयू
में सेल्फ फाइनेंस कोर्स की स्थिति बहुत खराब है। यहां पर मूलभूत संसाधनों
की भी कमी है। ऐसे में संसाधनों के
आभाव में एलयू में ढंग से पढ़ाई नहीं हो पाती। यही कारण है कि दिनों-दिन इन
कोर्स से छात्रों का मोहभंग हो रहा है। सेल्फ फाइनेंस कोर्सेज से होने
वाली कमाई विवि नियमति शिक्षकों व कर्मचारियों के वेतन और अन्य मदों पर
खर्च कर देता है।