राज्य प्रवेश परीक्षा (एसईई) की काउंसलिंग पूरी होने के बावजूद प्रदेश के
इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों की खाली चल रहीं सीटों को भरने की छूट दे
दी गई है।
ये कॉलेज कोर्ट के निर्देशानुसार अपने-अपने स्तर पर खाली सीटें
भर सकेंगे। बुधवार को हुई सेंट्रल एडमिशन बोर्ड (कैब) की बैठक में ये फैसला
लिया गया।
गौतमबुद्ध प्राविधिक
विश्वविद्यालय (जीबीटीयू) के कुलपति डॉ. आरके खांडल ने बताया कि कॉलेजों को
अपने स्तर पर सीटें भरने की छूट दी गई है। अब कॉलेज दो समाचार-पत्रों में
विज्ञापन देकर अभ्यर्थियों को दाखिले के लिए आमंत्रित करेंगे।
इसमें वे
पहले एसईई के अभ्यर्थियों और जेईई मेन के अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देंगे।
इसके बाद ऐसे अभ्यर्थी जिन्होंने एसईई व जेईई मेन नहीं दिया है और वे
फर्स्ट डिवीजन में पास हुए हैं उन्हें दाखिले के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
मिलेगा सेकेंड डिवीजन वालों को भी मौका
अगर फिर भी सीटें नहीं भरती हैं तो सेकंड डिवीजन के अभ्यर्थियों को भी
दाखिला दिया जा सकेगा। यह प्रक्रिया कॉलेज 15 अगस्त तक पूरा कर लें ताकि
फर्स्ट सेमेस्टर की पढ़ाई जल्द शुरू हो सके।
मालूम
हो कि एसईई के तहत इस बार ऑफ कैंपस ऑनलाइन काउंसलिंग की व्यवस्था की गई
थी। इसमें करीब 56,500 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था और अपनी-अपनी च्वॉइस
लॉक की थी।
इसके बाद पहली मेरिट सूची जारी हुई थी जिसमें अभ्यर्थियों को
उनकी च्वॉइस व रैंक के अनुसार सीटें अलॉट की गईं थी। जीबीटीयू ने अभ्यर्थियों
को यह भी मौका दिया था कि अगर कोई अभ्यर्थी अपनी एक च्वॉइस पर दाखिला लेने
के बाद दूसरी च्वॉइस छोड़ रहा है तो खाली सीट दूसरे अभ्यर्थी को मिल सके।
इसके लिए अपग्रेडेशन राउंड भी चलाया गया मगर इसके बावजूद प्रदेशभर में करीब
222 इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों के एमबीए कोर्स में एक भी सीट नहीं
भर पाई।
इसी तरह बीटेक कोर्स के लिए 54 इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों
में एक भी सीट नहीं भर पाई और लगभग 170 से ज्यादा इंजीनियरिंग कॉलेज ऐसे
होंगे जहां एक, दो या अधिकतम दस सीटें ही भर पाईं। ऐसे में अब कॉलेजों को
छूट दे दी गई है कि वे अपने स्तर पर सीटों को भर लें।