एलयू में एससी कैटेगरी के स्टूडेंट विपिन कुमार को एमबीए मार्केटिंग मैनेजमेंट में तीन बार लगातार फेल किया गया। जबकि उसके एमबीए चतुर्थ सेमेस्टर में 68 प्रतिशत अंक हैं।
वह यूजीसी द्वारा आयोजित नेट भी पास कर चुका है। इस पर ढाई महीने पहले छात्र ने एससी/एसटी आयोग में अपील की थी। आयोग ने लविवि से इस संबंध में सूचनाएं मांगी थीं।
तय तिथि तक सूचनाएं न देने पर आयोग ने लविवि के कुलपति को नोटिस जारी किया है। एमबीए के छात्र विपिन कुमार ने बताया कि उसने एमबीए में वर्ष 2010 में दाखिला लिया था।
एमबीए के दूसरे सेमेस्टर में शिक्षिका रितु नारंग ने उसे मार्केटिंग मैनेजमेंट के पेपर में फेल कर दिया। उसे पेपर पास करने के लिए तीन बार बैक पेपर दिया लेकिन उसे हर बार फेल कर दिया गया।
विपिन कुमार ने एलयू के अधिकारियों से उसकी कॉपियों की दोबारा जांच करवाने की अपील की लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। इस पर छात्र ने सितंबर महीने में एससी/एसटी आयोग में मामला दर्ज करवाया।
26 सितंबर को आयोग के सहायक निदेशक तरुख खन्ना ने एलयू को नोटिस जारी किया कि 7 अक्तूबर तक छात्र की कापी किसी अन्य विश्वविद्यालय के प्रबंधन विभाग से जंचवाकर आयोग को सूचित करें।
लेकिन लविवि प्रशासन के कान पर जूं नहीं रेंगी। आयोग ने 20 नवंबर को नोटिस जारी कर फिर इस प्रकरण पर पूछताछ की। लविवि द्वारा मामले को गंभीरता से न लेने पर आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया ने लविवि के कुलपति या मामले से जुड़े किसी वरिष्ठ अधिकारी को दस्तावेज सहित तलब कर लिया।
फिलहाल एलयू प्रशासन इस प्रकरण पर मंथन कर रहा है कि आयोग को जवाब क्या दिया जाए। क्योंकि छात्र को तीन बार फेल करने के साथ ही केवल दो नंबर दिए गए हैं।
वहीं स्टूडेंट ने सूचना के अधिकार के तहत अपनी कॉपी निकलवा ली है। स्टूडेंट अब इस प्रकरण पर आरपार की लड़ाई के मूड में है।
पुन: मूल्यांकन की व्यवस्था पर अटका पेंच
एलयू प्रशासन का कहना है कि इस प्रकरण में छात्र पुन: मूल्यांकन की मांग कर रहा है जबकि विवि में ऐसी व्यवस्था नहीं है। वहीं स्टूडेंट का कहना है कि एमबीए में ही शिक्षक डॉ. एसके कौशल की जांची कापी पर छात्रा अंकिता व अंजलि ने चैलेंज किया तो विवि प्रशासन ने दोबारा कापियां जंचवायी।
छात्रा के पास होने पर शिक्षक को डिबार किया गया था। एलएलबी में भी एक केस में दोबारा कापी जंचवायी गई।
एससी के फेल स्टूडेंट का आंदोलन पड़ा भारी
एमबीए में सिर्फ एक पेपर में बार-बार फेल हो रहे स्टूडेंट विपिन कुमार का कहना है कि वर्ष 2007 में एमबीए में एससी कैटेगरी के 27 स्टूडेंट फेल कर दिए गए थे। उस समय हमने इस मामले को एससी/एसटी में उठाया। जांच के बाद सभी स्टूडेंट पास कर दिए गए।
विपिन का कहना है कि आंदोलन से विवि के एमबीए विभाग के शिक्षक मुझसे चिढ़ गए। इसी के चलते उसे बार-बार फेल किया जा रहा है।