केंद्रीय विद्यालय संगठन की बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में लिया गया भाषा का फैसला छात्रों और अभिभावकों के लिए मुसीबत बन गया।
अभिभावकों में रोष
कक्षा छह से जर्मन भाषा पढ़ते आ रहे छात्रों ने इस साल अब तक जर्मन पढ़ी है, लेकिन तीन महीने बाद उन्हें संस्कृत का परीक्षा देना होगा। फैसले का असर दिखना शुरू हो गया है। शनिवार को केवि ओएनजीसी में कुछ अभिभावक रोष जताने पहुंचे।
केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से वर्ष 2010 में कक्षा छह से आठ तक तीसरे विषय के तौर पर जर्मन भाषा शुरू की गई थी। विदेशी भाषा और इसमें भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए भारी संख्या में छात्रों ने इसका चयन किया।
कक्षा छह, सात और इस साल अब तक जर्मन भाषा पढ़ चुके छात्रों को इसके बजाए संस्कृत पढ़कर परीक्षा देनी होगी। मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी की अध्यक्षता में हुई बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में यह फैसला किया गया है। शनिवार को केंद्रीय विद्यालय ओएनजीसी में भारी संख्या में अभिभावक प्राचार्य का घेराव करने पहुंचे।
उनका कहना था कि जिस बच्चे ने ढाई साल से जर्मन पढ़ी हो, वह अचानक संस्कृत में परीक्षा कैसे दे पाएगा। जबकि परीक्षा में भी महज तीन महीने का वक्त है।
केवि ओएनजीसी के प्राचार्य डीएस नेगी ने कहा कि ऊपर से आए आदेशों के तहत फैसला लिया गया है। उनके स्तर से इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता है।
हॉबी क्लास बन गई जर्मन
कल तक जिस विषय को मुख्य विषय के तौर पर पढ़ाया जाता था, अब केविएस ने उसे अतिरिक्त विषय या हॉबी क्लास के रूप में परिवर्तित कर दिया है। इससे इस भाषा में भविष्य तलाश रहे बच्चों के लिए मुसीबत बन गई है।