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रूसा डिग्री पर बाहरी विवि में प्रवेश दिलाने की तैयारी

Wed, 24 Feb 2016 11:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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रूसा डिग्री पर बवाल मचने के बाद प्रदेश विवि हरकत में आ गया है। दूसरे विश्वविद्यालयों में एचपीयू के कॉलेजों के पहले रूसा सीबीसीएस यूजी के पहले बैच के छात्रों की डिग्री को वहां के ईयर सिस्टम के समकक्ष करवाने और छात्रों को प्रवेश के लिए पात्र बनाने के लिए विवि प्रशासन मंथन करेगा।
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यूजीसी को विवि की ओर से इस संदर्भ में लेटर लिखे जाने की सूचना है, वहीं वीसी मान रहे हैं कि उन्होंने यूजीसी चेयरमैन से इस संदर्भ में चर्चा की है। मामले के उजागर होने के बाद विवि प्रशासन ने हाई पॉवर कमेटी की बैठक भी बुलाई है। वीसी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में कॉलेज प्राचार्यों के साथ ही रूसा को लागू करने का प्लान तैयार करने वाले वरिष्ठ प्रोफेसर भी बुलाए गए हैं।

बैठक में मुख्य रूप से पहले बैच के अंतिम छठे सेमेस्टर के छात्रों को अन्य विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने में आ रही परेशानी का ही हल निकालने के विकल्प तलाशे जाएंगे। यह भी फैसला लिया जाएगा कि कैसे पहले बैच की डिग्री को यूजीसी से बाकायदा अधिसूचना जारी करवाकर ईयर सिस्टम के तहत दी जा रही डिग्री के समकक्ष करवाया जाए।
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बैठक में विवि की रूसा हाई पॉवर कमेटी के तमाम सदस्य भी शरीक होंगे, जो हजारों छात्रों के भविष्य पर मंडरा रहे इस संकट का हल निकालने की कोशिश करेंगे। विवि के प्रति कुलपति प्रो. आर एस चौहान ने माना कि दो बजे रूसा हाई पावर कमेटी की बैठक बुलाई गई है।

बैठक में रूसा के पहले बैच के छात्रों को यूजी डिग्री लेने को न्यूनतम अंक निर्धारण के मामले पर चर्चा होनी है, क्योंकि नया सिस्टम लागू करने के समय न्यूनतम अंक 120 क्रेडिट्स रखे गए थे, मगर 2015 में इसे कम कर 106 क्रेडिट किया गया। रूसा के रुके परीक्षा परिणाम को जल्द तैयार कर घोषित करवाने पर भी चरचा होगी। वीरवार को अकादमिक काउंसिल की बैठक के लिए भी रूसा सीबीसीएस से संबंधित मामलों पर चर्चा होगी।

रूसी की डिग्री पर नहीं मिल रहा प्रवेश- एचपीयू देश का पहला सीबीसीएस यूजी कोर्स में लागू करने वाला विश्वविद्यालय है, जिस कारण यहां से पहले बैच के जून माह में पासआउट होने वाले छात्रों को अन्य विश्वविद्यालय में प्रवेश लेना मुश्किल हो रहा है। क्योंकि साइंस एमएससी जैसे विषय की प्रवेश परीक्षा के लिए तय सिर्फ साइंस विषयों

में बीएससी की शर्त सीबीसीएस से पासआउट छात्र पूरी नहीं कर पा रहे हैं। नए सिस्टम में छात्रों ने केमिस्ट्री मेजर के साथ आर्ट्स के विषय माइनर के रूप में पढ़े हैं। इसका समाधान सिर्फ यूजीसी ही कर सकेगा। भविष्य में यह समस्या नहीं रहेगी। इस बैच के लिए यह समस्या पेश आई है।
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