शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धज्जियां उड़ने की पोल खुलने के बाद उत्तराखंड शिक्षा विभाग बचाव को हड़बड़ी में है।
स्कॉलर्स होम स्कूल में बिना आदेश और बिना अभिभावकों की मांग के आरटीई के दाखिलों को वैध बनाने के लिए नगर शिक्षा अधिकारी सोमवार सुबह से ही नए दाखिलों के फार्मों पर वर्ष हटाकर एडमीशन कराने में जुट गए। फिलहाल विभाग के आला अधिकारी भी मामले में मौन हैं।
आरटीई के तहत वर्ष 2011-12 में स्कॉलर्स होम में किसी भी दाखिले के आदेश नहीं थे, लेकिन स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग के कुछ कर्मचारियों ने सामान्य दाखिलों को ही आरटीई में कन्वर्ट कर दिया। विभाग की ओर से जांच करने गई आरटीई प्रभारी तृप्ता शर्मा ने भी गड़बड़ी पाई है।
अमर उजाला में सोमवार को खबर प्रकाशित होने के बाद नगर शिक्षा अधिकारी इंद्रमनी बलोदी सुबह से ही बचाव में जुट गए। आनन-फानन में उन्होंने साल 2011 वाले एडमीशन को सही बताने के लिए फार्म भरवा दिए। इन पर बना वर्ष 2015 को सफेद इंक से हटा दिया गया।
आरटीई प्रभारी तृप्ता शर्मा ने कहा कि स्कूल में अवैध तरीके से दाखिले देकर आरटीई का शुल्क भी गया है। लिहाजा, वह मामले में कतई पक्ष नहीं ले सकती हैं। कहा कि वह अपनी रिपोर्ट आला अधिकारियों को भेज देंगी। बाकी कार्रवाई का अधिकार उनका है।
फाइलें भी उठवाईं
नगर शिक्षा अधिकारी इंद्रमनी बलोदी ने आरटीई के तहत मिली जांच को फाइलें दुरुस्त करने में बदल दिया है। इसके तहत रेसकोर्स स्थित गुरू नानक स्कूल में अलग से आफिस चलाया जा रहा है। यहां अभिभावकों को बुलाकर उनके प्रमाण पत्र जमा करवाए जा रहे हैं।
सोमवार को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद उन्होंने सभी फाइलें गायब करा दी हैं। इस बारे में जब उनसे बात करने का प्रयास किया गया तो संपर्क नहीं हो पाया। इस स्कूल में आरटीई से जुड़े काम करने की पुष्टि आरटीई प्रभारी तृप्ता शर्मा ने भी की है।