एलयू में अब जीरो फीस के फेर में स्टूडेंट का अगली कक्षा में दाखिला नहीं रोका जाएगा।
अभी तक सरकार से शुल्क प्रतिपूर्ति न हो पाने के कारण ऐसे हजारों छात्रों का प्रवेश अगली कक्षा में रोक दिया गया था।
इन छात्रों के सामने शर्त रखी गई थी कि वे बकाया फीस जमा करें तभी इन्हें आगे की कक्षा में दाखिला दिया जाएगा। क्योंकि विवि प्रशासन को इसके चक्कर में लाखों का नुकसान उठाना पड़ रहा था।
अब उन्हें फीस जमा करने के लिए इधर-उधर से धन का जुगाड़ नहीं करना होगा। स्नातक व परास्नातक कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों के लिए यह बड़ी राहत है।
सोमवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एसबी निमसे और मुख्य सचिव जावेद उस्मानी के बीच विश्वविद्यालय की विभिन्न समस्याओं को लेकर एक बैठक हुई।
इसमें एलयू में पढ़ने वाले एससी/एसटी, अल्पसंख्यक व ओबीसी की शुल्क प्रतिपूर्ति के मामले पर प्रमुखता से चर्चा की गई।
लविवि के अधिकारियों ने बताया कि समाज कल्याण विभाग, पिछड़ा वर्ग विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से अभी तक शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं हो पाई है।
ऐसे में लखनऊ विश्वविद्यालय पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। इन छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति न होने से इन्हें आगे पढ़ाने पर संकट हो सकता है।
इस पर शासन के अधिकारियों ने विवि प्रशासन से उसका मांगपत्र मांगा। कहा कि विभिन्न विभागों से जहां से इन्हें शुल्क प्रतिपूर्ति होनी है उसका भी पूरा ब्यौरा एकत्र कर लिया जाए, ताकि जो रकम देनी है उसे लेकर कोई असमंजस न रहे।
शासन के अधिकारियों ने विवि प्रशासन को भरोसा दिलाया कि उन्हें निशुल्क दाखिला लेने वाले छात्रों की पूरी फीस मिलेगी। अब आगे इसे लेकर एक हफ्ते के भीतर दोबारा बैठक की जाएगी।
इसमें विवि के अन्य मुद्दों पर चर्चा होगी। फिलहाल विवि प्रशासन और शासन के अधिकारियों के बीच हुई बैठक के बाद निशुल्क दाखिला लेने वाले स्टूडेंट को बड़ी राहत मिली है।
इससे विभिन्न कक्षाओं में पढ़ रहे करीब सात हजार छात्रों को फायदा मिलेगा। अभी तक शुल्क प्रतिपूर्ति के कारण आगे की कक्षा में दाखिला देने से मना किए जाने के कारण इन छात्रों के भविष्य पर दांव लगा हुआ था।
कई छात्र तो ऐसे थे जिन्होंने सेल्फ फाइनेंस के कोर्सों में दाखिला लिया है। इसमें मैनेजमेंट कोर्सों में प्रवेश लेने वाले छात्रों की फीस 54 हजार रुपये तक है।
इन छात्रों की शुल्क प्रतिपूर्ति की रकम फंसने से इनके सामने दोहरा संकट खड़ा हो गया था। इन्हें पिछली कक्षा की फीस की प्रतिपूर्ति देनी थी और आगे की कक्षा में प्रवेश लेना था।
ऐसे में छात्रों के सामने आगे की कक्षा में दाखिला लेना काफी मुश्किल हो गया था।