शिक्षा के अधिकार पर अपना अधिकार जमाने वाले गरीब ‘अमीरों’ ने अलग-अलग हथकंडों से इसका नाजायज फायदा उठाया है।
किसी ने अपना घर, अपना बिजनेस होते हुए भी आरटीई के तहत बच्चे का नामी स्कूल में दाखिला कराया तो किसी ने आरटीई का लाभ शहर के स्कूल में लेने के लिए दूर दराज से आकर यहां किराए पर मकान ले लिया है।
कई लोग तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने जो पता शिक्षा विभाग में दिया हुआ है, वह लापता हैं। ‘अमर उजाला’ की पड़ताल में दूसरे दिन भी ऐसे कई मामले प्रकाश में आए।
कमरा पांच हजार का, दाखिला आरटीई से
नाम : राजीव चौधरी, पता : लेन नंबर पांच, मकान नंबर 35, तपोवन एन्क्लेव,
हैसियत : शानदार कोठी में पांच हजार से ज्यादा किराए का मकान। रहन सहन मध्यम वर्ग से भी ऊपर। राजीव ने अपनी बेटी का दाखिला दून ब्लॉसम स्कूल में कराया हुआ है। उनकी हैसियत और रहन-सहन के हिसाब से कहीं से भी वह आरटीई के दायरे में नहीं आते हैं। बावजूद इसके बेटी को आरटीई में पढ़ा रहे हैं।
नाम : राजेंद्र कुमार, पता : ई-54, शिवलोक कॉलोनी, रायपुर,
पेशा : कॉस्मेटिक का बिजनेस। अपना घर, अच्छा बिजनेस, अच्छी हैसियत के बावजूद इनकी बेटी भी डालनवाला स्थित दून ब्लॉसम स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रही है। इन्होंने भी स्कूल में आरटीई के तहत बेटी का एडमिशन कराया है। आस पड़ोस के लोगों ने बताया कि उनका अपना घर है और हैसियत भी मध्यम श्रेणी परिवार की है।
नाम : मनोज कुमार पाल, पता : ए 72, एमडीडीए कॉलोनी, अधोईवाला
इस पते को जब ट्रेस किया गया तो वहां किसी और का मकान था। आसपास पूछने पर कोई भी इस नाम का व्यक्ति नहीं मिला। जाहिर तौर पर यह गलत पते पर दाखिला कराया गया होगा। इनका बेटा दून ब्लॉसम स्कूल में आरटीई के तहत पढ़ाई कर रहा है।
नाम : वीर सिंह चौहान, पता : 77 सरस्वती विहार, अधाईवाला
इस पते को ट्रेस करने के लिए पूरी कॉलोनी में घर-घर जाकर पूछताछ की गई। कई लोगों से बात की गई। पूरे सरस्वती विहार में कहीं पता नहीं मिला। किसी ने भी इस नाम के व्यक्ति के यहां रहने की पुष्टि नहीं की। इनका बेटा ब्राइटलैंड स्कूल में आरटीई के तहत पढ़ाई कर रहा है।