छात्र संघ चुनाव के तहत प्रचार करने से पहले छात्र संगठन बेहद अहम फरमान जरूर पढ़ लें। यह कोड से जुड़ा है। छात्र संगठनों के लिए अपनी मर्जी से स्टीकर पर कोड नंबर लगाकर प्रचार करना संगठनों को भारी पड़ सकता है।
डीएसडब्ल्यू ऑफिस की ओर से अलॉट किए बगैर ही संगठनों ने स्टीकर पर अल्फाबेटिकली कोड तय कर प्रचार शुरू कर दिया है, लेकिन इस बार कोड सिस्टम खत्म होने जा रहा है। बेलेट पेपर पर इस बार कैंडिडेट्स के नाम अल्फाबेटिकली ऑर्डर में नहीं होंगे।
अभी तक अल्फाबेटिकली ही नाम बेलेट पेपर पर होते थे। नाम के सीरियल नंबर को ही कोड नंबर माना जाता था। जिस कारण संगठन पहले से ही कार्यकर्ताओं और अन्य वोटर्स को कैंडिडेट नाम की ऑर्डर वाइज जानकारी दे देते थे, लेकिन इस बार बेलेट पेपर पर कैंडिडेट नाम डिपार्टमेंट वाइज हो सकते हैं।
हो सकता है कि कोई और नई प्रक्रिया इसके लिए इस्तेमाल में लाई जाए, लेकिन कैंडिडेट्स ने अपनी मर्जी से ही पहले की प्रक्रिया अनुसार कैंडिडेट नाम केपहले अक्षर अनुसार कोड तय कर स्टीकर बनवा लिए हैं। पीयू में हर छात्र संगठन के सदस्य पुरानी प्रक्रिया अनुसार ही कोड नंबर का प्रचार कर रहे हैं।