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पीयूः प्रोजेक्ट में लेटलतीफी से करोड़ों की चपत

Wed, 26 Mar 2014 12:44 PM IST
सुमित सिंह श्यौराण /अमर उजाला, चंडीगढ़
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देश की नंबर वन यूनिवर्सिटी का दर्जा पाने वाली पंजाब यूनिवर्सिटी के अधिकारी एक तरफ फीस बढ़ोतरी को लेकर आर्थिक तंगी की दुहाई दे रहे हैं।
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वहीं दूसरी तरफ बिना प्लानिंग कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट शुरू करने से पीयू को करोड़ों का चूना लग रहा है। पिछले करीब 7-8 साल से पीयू में शुरू किया गया एक भी प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं हो सका।

इतना ही नहीं इन प्रोजेक्ट की लागत दोगुणा से भी अधिक हो गई। ऐसे में पीयू के पास न तो प्रोजेक्ट को पूरी करने की हिम्मत है और न ही उसे बंद करने की।

पीयू कैंपस में कई ऐसी बिल्डिंग आधी अधूरी हैं, जिन पर लागत बढ़ने से उन पर काम शुरू नहीं हो पा रहा। पीयू में निर्माण कार्यों में देरी से करोड़ों की चपत लग रही है।
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22 मार्च को पीयू सीनेट में पैसे की बर्बादी को लेकर सीनेटर रघुबीर दयाल और डॉ. अजय रंगा ने प्रशासनिक अधिकारियों की इस पर जमकर खिंचाई की। अधिकारी भी इस मामले में कोई जवाब नहीं दे पाए। पीयू के कई बड़े प्रोजेक्ट सफेद हाथी बन गए हैं।

मल्टीपर्पज हाल- 28.50 से 65 करोड़ लागत
सेक्टर-25 पीयू साउथ कैंपस में कई हजार फीट में शहर का सबसे बड़ा मल्टीपर्पज हाल बनाने का काम 2009 में शुरू हुआ। 2500 सीटों वाले इस हाल की लागत शुरूआत में 28.50 करोड़ थी, लेकिन 2014 में इसकी अनुमानित लागत 60 से 65 करोड़ पहुंच चुकी है।

पीयू प्रशासन नौ करोड़ से अधिक राशि इस पर खर्च कर चुका है, लेकिन पीयू के पास अब इस प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए पैसा नहीं है। पीयू कुलपति प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर ने 2013 सीनेट में इस प्रोजेक्ट को बंद करने का फैसला लिया।

प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने तीन नवंबर 2009 दीक्षांत समारोह में मल्टीपर्पज हाल की नींव का पत्थर रखा था, लेकिन वर्तमान हालात में इस प्रोजेक्ट का पूरा हो पाना अब मुमकिन नहीं लग रहा।  
 
विद्यार्थियों से भी वसूले 6.5 करोड़
पीयू ने मल्टीपर्पज हाल के लिए विद्यार्थियों से 6.5 करोड़ रुपया वसूला है। इतना ही नहीं 2009 में बोर्ड ऑफ फाइनेंस ने तीन करोड़, 2010 में पीयू ने सात करोड़, सेंटर गवर्नमेंट ने 10 करोड़ और 11वें बजट में यूजीसी ने दो करोड़ रुपये जारी किए हैं। लेकिन, अब इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल कर करोड़ों बर्बाद कर दिए गए।

अस्पताल का काम भी रुका
पीयू साउथ कैंपस स्थित डेंटल कालेज के साथ ही लगती जमीन पर पीयू प्रशासन ने 150 बेड का अस्पताल बनाने का प्रोजेक्ट करीब पांच साल पहले तैयार किया। पांच करोड़ की लागत से बनने वाले अस्पताल का निर्माण कार्य भी लागत बढ़ने के कारण बीच में ही रोक देना पड़ा।

आधी बिल्डिंग बनाने के लिए पीयू ने लाखों खर्च कर डाले, लेकिन अब बिल्डिंग खंडहर बन गई है। पीयू कुलपति ने सीनेट में इस अस्पताल को चंडीगढ़ प्रशासन के सहयोग से तैयार करने का प्रपोजल भी तैयार करवाया। लेकिन, चंडीगढ़ प्रशासन ने इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
 
कालेज भवन की लागत पहुंची तीन करोड़  
22 मार्च को पीयू सीनेट में पीयू में चल रहे कंस्ट्रक्शन वर्क में करोड़ों के नुकसान को लेकर सीनेटर रघुबीर दयाल ने मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि पीयू में बन रहे कालेज भवन के लिए शुरूआती लागत 27.8 लाख के करीब थी, लेकिन कई साल तक चले निर्माण कार्य के बाद इस पर तीन करोड़ खर्च कर डाले।

उन्होंने कहा कि हर साल विद्यार्थियों से 50 रुपये कालेज भवन के नाम पर लिए जाते हैं, लेकिन पैसा देने वालों को इसका कोई लाभ नहीं हुआ। उधर, पीयू के हॉस्टल नंबर नौ का निर्माण कार्य भी दो साल देरी से होने के कारण उस पर तीन से चार करोड़ रुपये की लागत आई।

हर प्रोजेक्ट की होगी समय सीमा
पीयू सीनेटर में कंस्ट्रक्शन वर्क से करोड़ों के नुकसान को लेकर पूरी सीनेट ने मामले में कड़ी कार्रवाई की बात कही। सीनेटर प्रो. कर्मजीत सिंह ने कहा कि हर प्रोजेक्ट के लिए समय सीमा तय होनी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की जाए। उधर, रघुबीर दयाल ने अभी तक बने सभी कंस्ट्रक्टशन वर्क पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।
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एक तरफ पीयू प्रशासन आर्थिक तंगी की बात कहता है, तो दूसरी तरफ पीयू कैंपस में बेहिसाब पैसा कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट पर खर्च किया जा रहा है। कोई भी प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं होने से लागत करोड़ों रुपये बढ़ गई है। इस पैसे को बचाकर अन्य जरूरी चीजों पर खर्च किया जा सकता था।
रघुबीर दयाल (सीनेटर मुक्तसर, पंजाब यूनिवर्सिटी) 
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