सेंट्रल यूनिवर्सिटी की तर्ज पर पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में प्रोफेसरों की रिटायरमेंट की उम्र 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष किए जाने मांग को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचे याचियों को उस समय करारा झटका लगा, जब केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि पीयू कोई सेंट्रल यूनिवर्सिटी नहीं है और न ही यह स्टेट यूनिवर्सिटी है।
मंत्रालय का कहना है कि पंजाब री-ऑरगेनाजेशन एक्ट-1966 के तहत पीयू का दर्जा एक इंटर स्टेट बॉडी कॉर्पोरेट का है। ऐसे में इन मामलों में पंजाब सरकार की सहमति जरूरी है। फिर भी मंत्रालय ने इस मामले में विस्तृत जवाब देने के लिए हाईकोर्ट से समय मांगा।
इस पर हाईकोर्ट ने मंत्रालय से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या पीयू के प्रोफेसरों की रिटायरमेंट की उम्र 65 साल की जा सकती है। हाईकोर्ट के जस्टिस आरके जैन ने इस मामले में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव से 26 मई तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
मामले की अगली सुनवाई 26 मई को ही होगी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के हायर एजुकेशन विभाग के निदेशक हरप्रीत सिंह ने सोमवार को हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा कि भले ही केंद्र सरकार पीयू को अनुदान देती है, फिर भी इससे पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी नहीं माना जा सकता।
हलफनामे में केंद्र सरकार ने एसी जुल्का बनाम पंजाब यूनिवर्सिटी के मामले का हवाला देते हुए कहा कि उस मामले में भी पीयू को इंटर स्टेट बॉडी कॉर्पोरेट माना गया है न की सेंट्रल यूनिवर्सिटी। इस पर जस्टिस आरके जैन ने इस मामले में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय को यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए कि क्या पीयू के प्रोफेसरों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाई जा सकती है।