आंखों की रोशनी खोने के बावजूद पढ़ाई कर रहे बिल्लू की आखिरकार पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सुन ली है। हॉस्टल प्रबंधन ने उनकी फीस 5395 रुपये लौटा दी।
पीयू के लॉ विभाग के प्रथम सेमेस्टर के छात्र बिल्लू को हॉस्टल नंबर तीन प्रबंधन ने उसकी फीस रिफंड कर दी है।
दो साल की उम्र में मां को खाने वाले बिल्लू की आर्थिक हालत ठीक नहीं है। पिता भी कई साल से मानसिक रोगी हैं और उनका इलाज चल रहा है।
हॉस्टल मैस फीस न देने पर बिल्लू को निकालने की तैयारी हो गई थी। अमर उजाला ने 15 और 17 अक्तूबर के अंक में पीयू प्रशासन के रवैये और दृष्टिहीन विद्यार्थियों के लिए फीस पॉलिसी का मुद्दा उठाया था।
8 दिसंबर को हुई पीयू सीनेट में सीनेटर मनीष वर्मा ने भी यह मामला उठाया था। पूरी सीनेट ने उनका समर्थन किया और सभी दृष्टिहीन विद्यार्थियों की हॉस्टल और विभाग की फीस माफ करने का प्रस्ताव रखा।
बिल्लू जैसे स्पेशल केस में मैस चार्ज भी माफ करने के प्रस्ताव को सीनेट ने मंजूर कर दिया था। बाद में पीयू कुलपति ने फीस लौटाने के आदेश जारी किए थे।
नई पॉलिसी की तैयारी
ब्लाइंड विद्यार्थियों को हर साल फीस को लेकर कभी हॉस्टल तो कभी विभाग में तंग किया जाता है। बिल्लू बताते हैं कि पिछले साल प्रशासन के सख्त रवैये के कारण उसे लेट दाखिला मिला।
उससे लेट फीस भी वसूली गई। दृष्टिहीन विद्यार्थियों की शिकायतों के बाद अब पीयू प्रशासन नए सिरे से ब्लाइंड स्टूडेंट की फीस पॉलिसी बनाने की तैयारी में है।
ब्लाइंड स्टूडेंट की फीस संबंधी मामलों को लेकर पॉलिसी तैयार करने के लिए एआर को चिट्ठी लिखी गई है। पीयू प्रशासन बिल्लू जैसे केस में अपने स्तर पर हर संभव मदद करेगा।
-प्रो.एके भंडारी, रजिस्ट्रार पीयू