पीएसईबी द्वारा घोषित दसवीं कक्षा के रिजल्ट में कंपार्टमेंट और फेल विद्यार्थियों का भी रिकॉर्ड बन गया है। इस बार 87578 विद्यार्थियों की परीक्षा में कंपार्टमेंट आई हैं। जबकि, 41986 विद्यार्थी परीक्षा में सीधे रूप से फेल हुए हैं। सबसे खराब रिजल्ट अंग्रेजी विषय (78.79 प्रतिशत ) और सामाजिक शिक्षा विषय (82.70 प्रतिशत) का रहा है।
बोर्ड से मिली जानकारी के मुताबिक, सबसे खराब रिजल्ट में बरनाला का रहा है। बरनाला से परीक्षा में 8188 विद्यार्थी अपीयर हुए थे। इसमें 4192 विद्यार्थी परीक्षा पास कर पाए। जबकि, जिले की पास प्रतिशत 51.20 रही। जबकि मोहाली से इस बार 10766 विद्यार्थी अपीयर हुए थे। इनमें 5959 विद्यार्थी ही परीक्षा पास कर पाए।
विद्यार्थियों की पास प्रतिशत 55.35 रही है। रिजल्ट के मामले में डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल के जिला बठिंडा का हाल भी कुछ भी ठीक नहीं रहा है। बठिंडा से 17745 विद्यार्थी परीक्षा में अपीयर हुए थे। इनमें से 9958 विद्यार्थी परीक्षा पास कर पाए हैं। इसकी पास प्रतिशत 56.12 रही है।
जबकि, लोक संपर्क मंत्री अमृतसर बिक्रम सिंह मजीठिया का जिला अमृतसर सबसे आगे रहा है। जिले के 31802 विद्यार्थी परीक्षा में अपीयर हुए थे। इनमें से 27407 विद्यार्थी परीक्षा पास कर गए हैं। पास प्रतिशत 56.20 रही है।
इन विद्यार्थियों ने मेरिट में बनाई जगह
विद्यार्थी---------स्कूल----------------------------------------अंक-----रैंक
सिमरनप्रीत----गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल घंड़ूआं---------635----12
रिंधी जैन------बेबी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल बनूड़------------631-----16
मनीष---------फेज-3बी1 दशमेश खालसा पब्लिक स्कूल-----------630-----17
हरमनदीप-----आचार्य आत्मा राम जैन एसएसएस डेराबस्सी----------626----21
स्पोर्ट्स वाला एक भी विद्यार्थी मेरिट में नहीं
जिले को राज्य सरकार स्पोर्ट्स के हब के रूप में तैयार कर रही है। करोड़ों रुपये की लागत से सरकार ने शहर में कई स्टेडियम तैयार किए है। कोचिंग पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे है। लेकिन बोर्ड की मेरिट में एक भी विद्यार्थी अपनी जगह नहीं बना पाया है।
दूसरों को नसीहत खुद मियां फजीहत
शहर में फेज-3बी1 स्थित सरकारी स्कूल में एक ट्रेनिंग सेंटर है। जहां राज्यों के टीचरों को सालभर विभिन्न विषयों को पढ़ाने की ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग स्टेशनों में जिले के टीचरों द्वारा तैयार किए गए टीएलएम को ही आधार बनाकर ट्रेनिंग दी जाती है। जबकि, दसवीं के रिजल्ट में यह स्कूल पिछड़ गया। जबकि शिक्षामंत्री शहर में रहते हैं।